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Friday, March 18, 2022

अस्पताल में डॉक्टरों के बीच बने मतभेद एवं गुटबाजी

 C n I news gotegaw Narsinghpur se Sanjay sahu         

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अस्पताल में डॉक्टरों के बीच बने मतभेद एवं गुटबाजी



 करीब 4 माह बाद फिर बने डॉ.एस एस धुर्वे प्रभारी बीएमओ


यहाँ की आपसी तू- तू , मै- मै

से वरिष्ट अधिकारी भी है परेशान


 डॉक्टरों की कमी के चलते वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी नहीं कर पा रहे यहां के हालात ठीक......!


 अस्पताल में मरीजों का इलाज कम, डाक्टरों की मनमानी चल रही ज्यादा




नरसिंहपुर । गोटेगांव के सरकारी अस्पताल में करीब चार माह के बाद डॉ नंदकिशोर महलवाद के स्थान पर अब एक बार फिर से डॉ एस एस धुर्वे को बी एम ओ का प्रभार सौंपा गया है।इसके पीछे प्रमुख बजह यह है कि गोटेगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में पिछले लंबे समय से डॉक्टरों के बीच मतभेद अनेक मामलों को लेकर बने हुए हैं।


ये मतभेद डॉक्टरों की ड्यूटी पर न आने अवकाश लेकर घर से इलाज करने विभिन्न योजनाओं में आये फण्ड का घालमेल सहित बी एम ओ की कार्यप्रणाली पर आपत्ति सहित अन्य मामलों को लेकर है।डॉक्टरों के बीच मनमुटाव और यहाँ के बिगड़े हालात की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के साथ ही अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को भी है लेकिन डॉक्टरों की पर्याप्त संख्या न होने से अधिकारी भी यहाँ के हालात ठीक नहीं कर पा रहे है।जिससे सरकारी अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरायी हुई है।मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिलने से उन्हें बड़े शहरों के अस्पतालों में अपने इलाज के लिए जाना पड़ रहा है।जानकारी मिली है कि डॉ महलवाद ने लगातार ड्यूटी करने के कारण अस्वस्थता का पत्र लिखकर वरिष्ठ अधिकारी से उन्हें प्रभार से कार्यमुक्त करने का निवेदन किया था जिसे स्वीकार कर लिया गया है।जिससे उनके स्थान पर डॉ एस एस धुर्वे को बी एम ओ का प्रभार सौंपा गया है।हालांकि इन्हीं डॉ धुर्वे से करीब चार माह पहले बी एम ओ का प्रभार वापस लेकर डॉ महलवाद को दिया गया था।डॉ महलवाद ने कारण तो अस्वस्थता का बताया था लेकिन हकीकत यह है कि हर डॉक्टरों के बीच गुटबाजी ज्यादा है।जिसके चलते अस्पताल में कार्य कम और मनमानी ज्यादा चल रही है।अब यह देखना बाकी है कि डॉ धुर्वे कितने समय तक बी एम ओ रहेंगे और अस्पताल की व्यवस्था कैसे सुधरेगी।


अभी जो बी एम ओ के पद पर डॉ धुर्वे को पदस्थ किया गया है जो कि पहले से करकबेल उपस्वास्थ्य केंद्र के एकमात्र नियमित डॉक्टर है जिनकी सेवायें पूर्णतः करकबेल उपस्वास्थ्य केन्द्र को नहीं मिल पा रही है वो सप्ताह में केवल दो तीन दिन ही सेवायें दे पाते हैं अब बी एम ओ बनने के बाद करकबेल अस्पताल की व्यवस्था भी चरमरा जायेगी क्योंकि करकबेल क्षेत्र से कई गांव के लोग जुड़े हुए हैं जिन्हें स्वास्थ्य लाभ के लिए परेशानी का सामना करना पड़ेगा।अतः उच्चाधिकारियों से से निवेदन है कि करकबेल उपस्वास्थ्य केंद्र को भी ध्यान में रख कर उचित निर्णय लिया जावे।

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