छत्तीसगढ़ ।
16 बार नदी को पार करने के बाद मिलेगी मंढीप खोल गुफा
अक्षय तृतीया के बाद आने वाले पहले सोमवार 9 मई को खुलेगी मंढीप खोल गुफा के द्वारा ।
हितेश मानिकपुरी रायपुर । छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध और रहस्यमय मंढीप खोल गुफा का प्राकृतिक द्वार 9 मई को खुलेगा ।यह गुफा साल में एक बार अक्षय तृतीया के बाद आने वाले सोमवार को खुलती है ।
कोरोना संक्रमण की वजह से पिछले वर्ष यहा गुफा नही खुली थी ।
राजनांदगांव - नया जिला खैरागढ़ के अधीन आने वाले छुईखदान ब्लाक के मंढीपखोल गुफा का प्राकृतिक और धार्मिक नजरिए से काफी महत्व है ।
यहां पहुंचने से पहले श्रद्धालु महागौरी और हनुमान जी का दर्शन करते हैं। यह कहा जाता है कि यहां दर्शन के बाद गुफा के अंदर स्थित शिव मंदिर में दर्शन करना शुभकारी होता है । गुफा तक पहुंचने का मार्ग ठाकुरटोला चौक से शुरू होता है। गुफा तक पहुंचने के लिए जंगली रास्तों पर सफर करना पड़ता है
वहीं एक ही नदी को अलग अलग जगहों से 16 बार पार करना पड़ता है । गुफा के अंदर प्रवेश से पूर्व यहां के जमींदार द्वारा पूजा अर्चना की जाती है ।
द्वार पर रखे विशाल पत्थर को हटाने के बाद फायरिंग किया जाता है ।
उसके बाद लोग गुफा में प्रवेश करते है ।
खास बाते
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* गुफा के अंदर है शिवलिंग ।
* अंधेरे में चमकते है पत्थर ।
* पताल गंगा से दूर होते है रोग ।
* देशभर से लाखों की संख्या में पहुंचते है दर्शनार्थी ।
अक्षय तृतीया के आने वाले सोमवार 9 मई को खुलेगी मंढीप खोल गुफा ।
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यह गुफा अक्षय तृतीया के बाद आने वाले पहले सोमवार को खुलती है।
9 मई को यहां मेला का आयोजन किया गया है । आसपास के ग्रामीणों के अलावा छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र सहित देशभर के श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां पहुंचकर शिवदर्शन करेंगे ।
ठाकुरटोला के राज परिवार के सदस्यों द्वारा पूजा अर्चना के साथ दर्शन का सिलसिला शुरू हो जाएगा जो एक निश्चित अवधि तक चलेगा ।
बेहद रहस्यमय है गुफा ।
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गुफा के अंदर इतना अधिक अंधेरा रहता है कि लोगों को अपना ही हाथ दिखाई नहीं देता है । यहां लोगों को रोशनी के लिए टार्च या मशाल का उपयोग करना पड़ता है।
गुफा के अंदर रोशनी में जुगनू की तरह चमकते पत्थर दिखाई देती है । यहां कई शिवलिंग भी स्थापित है। गुफा में अनेक विचित्र रास्ते है ।
बताया जाता है कि इस गुफा के अंतिम छोर का कई कोशिशो के बाद पता नहीं लग पाया है ।
यहां की चमगादड़ खोल गुफा को सबसे पवित्र माना जाता है । इस गुफा तक पहुंचने के लिए बांस और रस्सी की सीढ़ी का उपयोग करना पड़ता है ।
जहां शिव लिंग विराज मान है ।
सी एन आई न्यूज के लिये हितेश मानिकपुरी की रिपोर्ट ।
































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