मधुर साहित्य परिषद का 20वां स्थापना दिवस मनाया गया
सीएनआई न्यूज़ बालोद से उत्तम साहू
बालोद। हरेली के पावन पर्व 28 जुलाई को मधुर साहित्य परिषद जिला बालोद का 20 वां स्थापना दिवस संस्था के संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ.अशोक आकाश के निवास श्री हरि सदन कोहंगाटोला में मनाया गया। कार्यक्रम में जिला के साहित्यकारों की उपस्थिति रही जहां मधुर साहित्य परिषद की साहित्य यात्रा पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम का संचालन मधुर साहित्य परिषद तहसील लोहारा इकाई सचिव लालेश्वर अरुणाभ द्वारा किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मधुर साहित्य परिषद जिला अध्यक्ष डॉ. अशोक आकाश थे अध्यक्षता संतश्री दिनेंद्र दास साहेब अध्यक्ष मधुर साहित्य परिषद तहसील इकाई बालोद ने की।
विशेष अतिथि डॉ.एस.एल.गंधर्व, देव जोशी गुलाब ,देवनारायण नगरिहा ,समाज सेवी खिलेश्वरी साहू ,सरपंच हिरोंदी बाई साहू उपस्थित रहे। कार्यक्रम मे मधुर साहित्य परिषद की साहित्य यात्रा पर बात करते संस्था प्रमुख डॉ. अशोक आकाश ने साहित्य को समाज की नींव का पत्थर बताते हुए कहा जिस समाज में साहित्य पुष्ट होता है वह समाज परिपुष्ट होता है। उन्होने साहित्यकारों को श्रेष्ठ साहित्य सृजन का संदेश देते छत्तीसगढ़ी भाषा साहित्य लेखन पर विशेष ध्यान देना समय की जरूरत बताया।उन्होंने आगे कहा कि आज हमें छत्तीसगढ़ राज्य में छत्तीसगढ़ी भाषा की उन्नति पर विशेष ध्यान देना चाहिए सिर्फ कविता लेखन पर ही ध्यान ना हो हमें साहित्य की समस्त विधाओं पर अपनी लेखनी अनवरत चलानी होगी। विशेष रूप से विमर्शात्मक सृजन करें तभी हम अपनी हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी भाषा को समृद्ध करने में सफल हो पाएंगे। अध्यक्षता करते हुए संत दिनेंद्र दास साहेब ने साहित्य की बारीकियों पर एवं साहित्य समिति को पुष्ट करने के मुद्दों पर अपनी बात रखते विचार संप्रेषण किया औऱ गुरु पर भजन सुनाते हुए सबको मंत्र मुग्ध किया।विशेष अतिथि की आसंदी से संस्था के महासचिव देव जोशी गुलाब ने मधुर साहित्य परिषद के प्रारंभिक साहित्यिक अवदान को याद किया एवं साहित्यकार की उल्लेखनीय भूमिका पर अपनी बात रखते उन्होंने कहा साहित्य समाज का पथ प्रदर्शक होता है। साहित्यकार समज के लिए दाता होता है ,इसलिए साहित्यकार को इस क्षेत्र में विशिष्ट कार्य करने की आवश्यकता होती है। सचेत साहित्यकार की भूमिका में हम समाज को कुछ नया और अच्छा साहित्य दें, यही संकल्प हमारे आज के इस कार्यक्रम की सफलता होगी।डाँ एस एल गंधर्व ने हास्य एवं चुटकुले अंदाज में संगठनात्मक गतिविधियों पर चर्चा करते कहा साहित्य समिति के माध्यम से हम समाज को क्या दे सकते हैं इस पर हमें विचार करनी चाहिए ।कार्यक्रम की बधाई संप्रेषित करते हुए कहा कि अनुभव से आदमी सीखता है साहित्यकार जो भी लिखता है घटित हो रहे घटनाक्रम को, अनुभव को लिखता है और अनुभव के माध्यम से लिखा हुआ प्रत्येक पंक्ति साहित्य के रूप में समाज का पथ प्रदर्शक होता है। कोषाध्यक्ष देव नारायण नगरिहा ने काव्यात्मक अभिव्यक्ति देती हुई पंक्तियों से समाज को बड़ा संदेश दिया कि वर्तमान में पारंपरिक किसानी के औजारों का स्थान मशीनों ने ले लिया है और इसका हमारे जीवन में क्या प्रभाव पड़ता है इस पर उन्होंने गहराई से अपनी बात रखी। तहसील इकाई लोहारा के अध्यक्ष कन्हैयालाल बारले ने कहा कि साहित्यकार एक सिपाही की तरह सजग प्रहरी होता है जो अपने विचारों के मंथन से निकले हुए शब्दों को पंक्तयों में पिरोकर साहित्य का सृजन करता है।साहित्यकार नये एवं मौलिक विचार का बड़ा अवदान समाज को देता है उन्होंने " रुख राई ल झन काटव जी" गीत से पर्यावरण संरक्षण का बड़ा संदेश दिया ।संचालन करते हुए कवि लालेश्वर अरुणाभ ने शृंगारिक गजल पेश की।
श्रीमती हर्षा देवाँगन ने छत्तीसगढ़ी सृंगारिक गीत की प्रस्तुति दी। मधुर काव्यांजली का संचालन कर रहे जयकांत पटेल ने बेटी पर अपनी उत्कृष्ट कविता पढ़ी । रमेंद्र सिंह नायक ने हरेली तिहार को नयी नवेली दुल्हन बताते हुए छत्तीसगढ़ी कविता पाठ किया। दुलेश देवाँगन ने आपनी उत्कृठ गजल पढ़ी। देव जोशी गुलाब ने छत्तीसगढ़ी गीत सुना कर सबका मन मोह लिया। अंत मे डाँ अशोक आकाश वरीष्ठ साहित्यकार ने अपनी खण्ड काव्य किन्नर व्यथा की कुछ कडियों का पाठ करके इस आयोजन को ऊचाईयां प्रदान की। इस दौरान गंगा देवी साहू,, हेमलता साहू, सद्भावना,हरीतिमा साहू, राजेन्द्र कुमार देवाँगन की उपस्थिति रही।देव जोशी गुलाब के आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम समापन की घोषणा की गई।


















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