भारत साहू जिला बालोद छत्तीसगढ़
कोटगांव ग्राम पंचायत में अविश्वास प्रस्ताव सरपंच के गई कुर्सी
भारतीय जनता पार्टी मंडल अध्यक्ष और पूर्व जनपद अध्यक्ष की भूमिका को लेकर सवाल
क्या है पूरा मामला
गुंडरदेही ब्लॉक के ग्राम पंचायत कोट गांव में पंचों ने सरपंच के खिलाफ अविश्वास मत लाकर सरपंच की कुर्सी छीन ली
पूरे घटनाक्रम में सरपंच को बचाने सरपंच संघ ने जोर लगाया लेकिन सत्ता और सरकार के सामने सरपंचों की नहीं चली सरपंच भारतीय जनता पार्टी के समर्थक बताए जा रहे हैं
जबकि उनके पति भारतीय जनता युवा मोर्चा से जुड़े हैं और पहले मंडल अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में जिला मंत्री हैं इस मामले में भाजपा के मंडल अध्यक्ष जीतू विश्वास गुप्ता और पूर्व जनपद अध्यक्ष सालिक देशमुख की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं सरपंच को अविश्वास मत में गिराने सक्रिय भूमिका निभाने का आरोप लगाया जा रहा है
पंचायत राज अधिनियम में बड़ी विडंबना है
पंचायत राज अधिनियम में या प्रावधान है कि सरपंच के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाकर उसे हटाया जा सकता है लेकिन सवाल यह है कि जनता द्वारा चुने गए सरपंच को पंचों के द्वारा गिरना लोकतंत्र की हत्या है यह अधिकार आम मतदाता का होना चाहिए ना की पांचों का सरकार को इस तरह के घटनाक्रम में पंचायत राज अधिनियम में बदलाव करने की जरूरतहै
जनता की सवाल सरपंच को जनता ने चुना उसे पंचों द्वारा अविश्वास लाकर गिरना क्या उचित है क्या पंचों को यह अधिकार है कि वह निर्वाचित सरपंच को हटा दें क्या यह लोकतंत्र की हत्या नहीं है सरपंच पर लगाया गया आरोप के निष्पक्ष जांच होनी चाहिए
साहू समाज की नाराजगी
अविश्वास मत के दौरान पूरे घटनाक्रम में साहू समाज के प्रति विरोध और सक्रियता देखने को मिली साहू समाज के बड़े पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि पूरे विधानसभा में भाजपा संगठन में साहू समाज को कोई बड़ा पद नहीं दिया गया है जिससे राजनीतिक उपेक्षा की भावना बनी हुई है
महत्वपूर्ण तथ्य छत्तीसगढ़ में कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया और बहुमत से सरपंच के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित हो सकता है वैधता पर आपत्ति के लिए कलेक्टर के समक्ष प्रक्रिया उपलब्ध है यह केवल एक पंचायत का मामला नहीं है बल्कि लोकतंत्र और पंचायत राज का गरिमा का प्रश्न है




















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