बिलाईगढ़ में नगर पंचायत अध्यक्ष चुनाव की आहट, सियासी सरगर्मी तेज; नरेश देवांगन की संभावित दावेदारी से मुकाबला हो सकता है दिलचस्प
भाजपा-कांग्रेस के प्रति जनता में नाराजगी और निर्दलीय प्रत्याशी के प्रति बढ़ती सहानुभूति बदल सकती है चुनावी समीकरण, संभावित निर्दलीय उम्मीदवार की जीत की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज
बिलाईगढ़। नगर पंचायत बिलाईगढ़ में अध्यक्ष पद को लेकर राजनीतिक हलचल तेज होने लगी है। अध्यक्ष पद रिक्त होने के बाद नगर की राजनीति में संभावित दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही प्रमुख दलों में प्रत्याशी चयन को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। वहीं निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में संभावित दावेदारी को लेकर भी राजनीतिक समीकरण दिलचस्प होते नजर आ रहे हैं। खासकर नरेश देवांगन के नाम की चर्चा ने चुनावी माहौल में नई हलचल पैदा कर दी है।
नगर पंचायत बिलाईगढ़ में पिछले कुछ समय से जारी राजनीतिक खींचतान, प्रशासनिक अस्थिरता और विकास कार्यों में आ रही बाधाओं को लेकर भी नगरवासियों के बीच चर्चाएं हैं। अध्यक्ष पद को लेकर विवाद और राजनीतिक खींचतान का असर नगर के विकास कार्यों एवं प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ने की बातें सामने आती रही हैं। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों के प्रति जनता के एक वर्ग में नाराजगी का माहौल बनने की चर्चा है। वहीं दलगत राजनीति से अलग किसी स्थानीय और अनुभवी निर्दलीय चेहरे को मौका देने की सोच भी जोर पकड़ सकती है। यदि यह रुझान मतों में तब्दील होता है, तो संभावित निर्दलीय उम्मीदवार की स्थिति काफी मजबूत हो सकती है।
नगर की राजनीति में देवांगन एक अनुभवी और परिचित चेहरे के रूप में देखे जाते हैं। वे प्रथम नगर पंचायत अध्यक्ष पूर्णिमा देवांगन के प्रतिनिधि के रूप में पूरे कार्यकाल में सक्रिय रहे हैं। इसके अलावा एक बार नगर पंचायत उपाध्यक्ष का दायित्व संभाल चुके हैं तथा पूर्व में 2 बार पार्षद रह चुके है और वर्तमान में वार्ड क्रमांक 12 से पार्षद हैं। स्थानीय स्तर पर लोगों से उनके निरंतर संपर्क, जनहित से जुड़े कार्यों में सक्रियता तथा सुख-दुख में सहभागिता से भारी मतों से विजयी होते आ रहे है इसे उनकी राजनीतिक ताकत माना जा रहा है। उनके समर्थकों के बीच भी उम्मीदवारी को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है। राजनीतिक जानकारों के बीच यह चर्चा है कि यदि भाजपा और कांग्रेस के प्रति नाराजगी तथा निर्दलीय प्रत्याशी के प्रति सहानुभूति एकजुट होती है, तो इस संभावित निर्दलीय दावेदार के लिए जीत का रास्ता आसान हो सकता है।
कांग्रेस में इन नामों की चर्चा
कांग्रेस की ओर से संभावित दावेदारों में शेखर भट्ट, आशीष भट्ट और लकेश्वर देवांगन के नाम चर्चा में हैं। शेखर भट्ट पूर्व में सरपंच, पार्षद एवं कार्यवाहक अध्यक्ष प्रतिनिधि की भूमिका निभा चुके हैं। आशीष भट्ट अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष हैं और राजनीतिक रूप से नए चेहरे के तौर पर देखे जा रहे हैं। वहीं लकेश्वर देवांगन पूर्व पार्षद होने के साथ वर्तमान में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बिलाईगढ़ के अध्यक्ष हैं। पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी को लेकर अंतिम निर्णय संगठन स्तर पर होना है।
भाजपा में भी कई चेहरे दावेदारी की दौड़ में
भाजपा की ओर से रामनारायण देवांगन, प्रदीप देवांगन और संतोष देवांगन के नाम संभावित दावेदारों के रूप में सामने आ रहे हैं। रामनारायण देवांगन पूर्व मंडल अध्यक्ष, नगर पंचायत उपाध्यक्ष एवं कार्यवाहक अध्यक्ष रह चुके हैं तथा वर्तमान में जिला महामंत्री हैं। प्रदीप देवांगन व्यापारी संघ के अध्यक्ष होने के साथ नगर के विभिन्न विकास एवं जनहित से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। वहीं संतोष देवांगन पूर्व पार्षद एवं वर्तमान में वार्ड क्रमांक 11 के पार्षद हैं। तीनों नामों को लेकर स्थानीय राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं।
निर्दलीय दावेदारी बन सकती है चुनाव का अहम समीकरण
बिलाईगढ़ की राजनीति में निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका पहले भी महत्वपूर्ण रही है। पिछले नगर पंचायत चुनाव में दामोदर प्रसाद दुबे ने कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों को पीछे छोड़ते हुए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की थी। इससे स्थानीय राजनीति में निर्दलीय प्रत्याशी की संभावनाओं को भी मजबूती मिली है। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में भी यदि दोनों प्रमुख दलों के प्रति नाराजगी और निर्दलीय प्रत्याशी के प्रति सहानुभूति का रुझान मजबूत होता है, तो संभावित उम्मीदवार चुनाव में बड़ा उलटफेर कर सकता है। हालांकि पूर्व अध्यक्ष से जुड़े न्यायालयीन मामले की प्रक्रिया लंबित होने की चर्चा है। ऐसे में आगे की राजनीतिक और चुनावी स्थिति संबंधित न्यायालयीन आदेशों एवं निर्वाचन प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
किसके पक्ष में बनेगा जनता का रुझान?
फिलहाल नगर पंचायत अध्यक्ष चुनाव को लेकर किसी भी दल या प्रत्याशी की अधिकृत घोषणा नहीं हुई है। लेकिन संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता और राजनीतिक चर्चाओं ने चुनावी माहौल गर्म कर दिया है। कांग्रेस और भाजपा के सामने मजबूत स्थानीय चेहरे को मैदान में उतारने की चुनौती होगी। वहीं नगर में व्याप्त राजनीतिक खींचतान, प्रशासनिक अस्थिरता और विकास कार्यों को लेकर उठ रहे सवाल चुनाव में महत्वपूर्ण मुद्दे बन सकते हैं। ऐसे माहौल में निर्दलीय प्रत्याशी की संभावित दावेदारी केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि भाजपा-कांग्रेस के सामने मजबूत चुनौती बनकर उभर सकती है। उनके राजनीतिक अनुभव, स्थानीय संपर्क और संभावित जनसमर्थन को देखते हुए जीत की संभावनाओं को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। अब देखना होगा कि चुनावी मैदान में कौन-कौन उतरता है और बिलाईगढ़ की जनता दलगत राजनीति को प्राथमिकता देती है या स्थानीय नेतृत्व पर भरोसा जताकर नया राजनीतिक इतिहास रचती है।


















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