बिलाईगढ़ के अस्थाई गौठान में 48 घंटे में 11 गोवंशों की मौत, आखिर जिम्मेदार कौन?
चारा-पानी और छत का अभाव, कीचड़ में रहने को मजबूर गोवंश; मृत पशुओं को खुले में फेंकने से दुर्गंध और संक्रमण का खतरा
बिलाईगढ़। नगर पंचायत बिलाईगढ़ के बगल में संचालित अस्थाई गौठान में गोवंशों की लगातार हो रही मौतों ने पशु संरक्षण की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, 29 अक्टूबर को 5 और 30 अक्टूबर को 6 गोवंशों की मौत हुई। इस तरह महज दो दिनों में कुल 11 गोवंशों की जान चली गई। गौठान में व्याप्त अव्यवस्थाओं के बीच इतनी बड़ी संख्या में गोवंशों की मौत आखिर किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
गौठान की जमीनी स्थिति बेहद चिंताजनक बताई जा रही है। यहां गोवंशों के लिए पर्याप्त चारा-पानी की व्यवस्था नजर नहीं आ रही है। बारिश के चलते पूरा परिसर कीचड़ से सराबोर है और पशुओं को बारिश तथा ठंड से बचाने के लिए पर्याप्त छत एवं सुरक्षित आश्रय भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में कमजोर और बीमार गोवंशों को प्रतिकूल मौसम के बीच खुले में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। पशुओं के संरक्षण के नाम पर बनाई गई व्यवस्था में बुनियादी सुविधाओं का अभाव कई सवाल खड़े कर रहा है।
नगर पंचायत कार्यालय के सामने भी मिला मृत गोवंश
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गौठान परिसर के अलावा नगर पंचायत कार्यालय के सामने भी मृत गोवंश पाए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि गौठान समिति के कहने पर नगर पंचायत के सफाई कर्मचारियों द्वारा मृत पशुओं को उठाकर नगर से बाहर जनपद पंचायत की नर्सरी के आगे खुले स्थान पर फेंक दिया गया। खुले में मृत पशुओं को छोड़ने से आसपास दुर्गंध फैल रही है। इससे आम नागरिकों के साथ-साथ आसपास विचरण करने वाले अन्य जीव-जंतुओं के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
जवाबदेही तय करने की मांग
गोवंशों के संरक्षण के लिए गठित समिति और नगर पंचायत की जिम्मेदारी है कि पशुओं को पर्याप्त चारा, स्वच्छ पेयजल, सुरक्षित आश्रय और नियमित देखरेख उपलब्ध कराई जाए। लेकिन यदि गौठान में इन बुनियादी सुविधाओं का ही अभाव है और महज 48 घंटे में 11 गोवंशों की मौत हो जाती है, तो व्यवस्था की जवाबदेही तय होना जरूरी है। अब सवाल यह है कि इन मौतों के वास्तविक कारणों की जांच कौन करेगा? गौठान समिति की भूमिका की जांच होगी या नगर पंचायत प्रशासन जिम्मेदारी लेगा? स्थानीय प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच, मृत गोवंशों का नियमानुसार निस्तारण, गौठान की व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग उठ रही है।
गौठान समिति अध्यक्ष गुलाल प्रसाद देवांगन:– गौठान में चारा-पानी की पर्याप्त व्यवस्था है। मवेशियों के लिए छाया की व्यवस्था भी की गई थी, लेकिन मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर हेलीपैड निर्माण के लिए उक्त छाया को हटा दिया गया। दोबारा छाया की व्यवस्था की जा रही थी, इसी दौरान अचानक मौसम खराब हो गया और बारिश शुरू हो गई। इसी बीच गौवंशों की मौत की घटना हुई।


















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