शिकायत, खबर और दस्तावेज सामने… फिर भी निर्माण जारी!
बिलाईगढ़ में कथित अवैध व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स पर प्रशासन की चुप्पी से उठे सवाल
बिलाईगढ़। नगर पंचायत बिलाईगढ़ में कथित अवैध व्यावसायिक निर्माण को लेकर शिकायत, दस्तावेज और समाचार प्रकाशन के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। अधिवक्ता सोनू कुमार अग्रवाल द्वारा मुख्य सचिव, कलेक्टर सारंगढ़-बिलाईगढ़, नगर तथा ग्राम निवेश कार्यालय बलौदाबाजार, एसडीएम बिलाईगढ़ एवं नगर पंचायत बिलाईगढ़ को लिखित शिकायत देकर निखिल सिंघानिया के निर्माणाधीन व्यावसायिक परिसर की जांच, निर्माण रोकने तथा नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से आवश्यक विकास अनुज्ञा प्राप्त किए बिना निर्माण कराया गया।
शिकायत में छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की संबंधित धाराओं के उल्लंघन का उल्लेख करते हुए यह भी आरोप लगाया गया कि व्यपवर्तन आदेश में निर्धारित विभागीय शर्तों का पालन नहीं किया गया। शिकायतकर्ता ने निर्माण के कारण शासन को राजस्व की क्षति होने का भी आरोप लगाया है। शिकायत के साथ संबंधित दस्तावेज एवं निर्माणाधीन भवन के छायाचित्र भी प्रस्तुत किए गए थे।
खबर प्रकाशित हुई, लेकिन कार्रवाई का पता नहीं
मामले की शिकायत के बाद विभिन्न समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित होने के बावजूद निर्माण को लेकर अब तक प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट सार्वजनिक कार्रवाई सामने नहीं आई है। यही स्थिति अब सबसे बड़ा सवाल बन गई है—शिकायत गंभीर है तो जांच कहां तक पहुंची और कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
शिकायतकर्ता के अनुसार निर्माणाधीन परिसर में बजाज फाइनेंस एवं मारुति सुजुकी के शोरूम/व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि निर्माण की वैधता को लेकर शिकायत जिला प्रशासन के संज्ञान में है, तो संबंधित विभागों द्वारा स्थल निरीक्षण एवं दस्तावेजों की जांच क्यों नहीं की गई?
‘किसके दबाव में मौन?’—शिकायतकर्ता के आरोप से गरमाया मामला
शिकायतकर्ता का आरोप है कि अनुभाग स्तर से लेकर जिला प्रशासन तक मामला पहुंचने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि कहीं किसी प्रभावशाली व्यक्ति अथवा राजनीतिक दबाव के कारण तो कार्रवाई नहीं रोकी जा रही? हालांकि दबाव या किसी अधिकारी/राजनेता की संलिप्तता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मामले में अब प्रशासन के सामने दो रास्ते स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं—यदि निर्माण नियमसम्मत है तो संबंधित स्वीकृतियां एवं नगर तथा ग्राम निवेश की अनुज्ञा की स्थिति स्पष्ट की जाए, और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले में कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिकायत, समाचार प्रकाशन और लगातार जारी निर्माण के बीच अब निगाह इस बात पर है कि जिला प्रशासन जांच कर सच सामने लाता है या मामला शिकायतों और फाइलों के बीच ही उलझा रहता है।


















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