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Tuesday, September 27, 2022

वैदिक पंचांग - दिनांक - 27 सितम्बर 2022


 *🌞ll ~ वैदिक पंचांग ~  ll🌞*   

🌤️ *दिनांक - 27 सितम्बर  2022*

🌤️ *दिन - मंगलवार*

🌤️ *विक्रम संवत - 2079*

🌤️ *शक संवत -1944*

🌤️ *अयन - दक्षिणायन*

🌤️ *ऋतु - शरद ॠतु* 

🌤️ *मास - अश्विन*

🌤️ *पक्ष - शुक्ल* 

🌤️ *तिथि - द्वितीया 28 सितम्बर रात्रि 02:28 तक तत्पश्चात तृतीया*

🌤️ *नक्षत्र - चित्रा 28 सितम्बर प्रातः 06:14 तक तत्पश्चात स्वाती*

🌤️ *योग - ब्रह्म सुबह 06:44 तक तत्पश्चात  इन्द्र*

🌤️  *राहुकाल - शाम 03:30 से  शाम 05:00 तक*

🌞 *सूर्योदय - 05:2l39*

🌦️ *सूर्यास्त - 06:02*

👉  *दिशाशूल - उत्तर  दिशा में*


🔥 *विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा  बैगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

    


🌷 *शारदीय नवरात्रि* 🌷

🙏🏻 *अश्विन मास के नवरात्रि  का आरंभ 26 सितम्बर, सोमवार से हो गया है। मान्यता है कि नवरात्रि में रोज देवी को अलग-अलग भोग लगाने से तथा बाद में इन चीजों का दान करने से हर मनोकामना पूरी हो जाती है। जानिए नवरात्रि में किस तिथि को देवी को क्या भोग लगाएं-*

🙏🏻  *नवरात्रि की द्वितीया तिथि यानी दूसरे दिन माता दुर्गा को शक्कर का भोग लगाएं ।इससे उम्र लंबी होती है ।*

👉🏻 शेष कल............



🌷 *शारदीय नवरात्रि* 🌷

🙏🏻 *अश्विन मास की शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तिथि तक शारदीय नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस बार शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ 26 सितम्बर, सोमवार से हो गया है, धर्म ग्रंथों के अनुसार, नवरात्रि में हर तिथि पर माता के एक विशेष रूप का पूजन करने से भक्त की हर मनोकामना पूरी होती है। जानिए नवरात्रि में किस दिन देवी के कौन से स्वरूप की पूजा करें-*

🌷 *तप की शक्ति का प्रतीक है मां ब्रह्मचारिणी*

🙏🏻 *नवरात्रि की द्वितीया तिथि पर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। देवी ब्रह्मचारिणी ब्रह्म शक्ति यानी तप की शक्ति का प्रतीक हैं। इनकी आराधना से भक्त की तप करने की शक्ति बढ़ती है। साथ ही, सभी मनोवांछित कार्य पूर्ण होते हैं।*

🙏🏻 *मां ब्रह्मचारिणी हमें यह संदेश देती है कि जीवन में बिना तपस्या अर्थात कठोर परिश्रम के सफलता प्राप्त करना असंभव है। बिना श्रम के सफलता प्राप्त करना ईश्वर के प्रबंधन के विपरीत है। अत: ब्रह्मशक्ति अर्थात समझने व तप करने की शक्ति हेतु इस दिन शक्ति का स्मरण करें। योगशास्त्र में यह शक्ति स्वाधिष्ठान चक्र में स्थित होती है। अत: समस्त ध्यान स्वाधिष्ठान चक्र में करने से यह शक्ति बलवान होती है एवं सर्वत्र सिद्धि व विजय प्राप्त होती है।*

👉🏻 शेष कल...........

     


🌷 *नवरात्रि  में त्रिदेवी आराधना* 🌷

🙏🏻 *नवरात्रि  में 9 तिथियों को 3-3-3 तिथि में बांटा गया है। प्रथम 3 तिथि माँ दुर्गा की पूजा (तमस को जीतने की आराधना), बीच की तीन तिथि माँ लक्ष्मी की पूजा (रजस को जीतने की आराधना) तथा अंतिम तीन तिथि  माँ सरस्वती की पूजा (सत्व को जीतने की आराधना) विशेष रूप से की जाती है।*

🙏🏻 *दुर्गा की पूजा करके प्रथम तीन दिनों में मनुष्य अपने अंदर उपस्थित दैत्य, अपने विघ्न, रोग, पाप तथा शत्रु का नाश कर डालता है। उसके बाद अगले तीन दिन सभी भौतिकवादी, आध्यात्मिक धन और समृद्धि प्राप्त करने के लिए देवी लक्ष्मी की पूजा करता है। अंत में आध्यात्मिक ज्ञान के उद्देश्य से कला तथा ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की आराधना करता है ।*

👉🏻 *अब मैं तीनों शक्तियों की आराधना के मूल मंत्रों का वर्णन करता हूँ। नवरात्र में इनका यथासंभव जप करना चाहिए।*

🙏🏻 *१. दुर्गाजी का उत्तमोत्तम नवार्ण मंत्र महामंत्र है। इसको मंत्रराज कहा गया है। नवार्ण मंत्र की साधना धन-धान्य, सुख-समृद्धि आदि सहित सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करती है।*

🌷 *“ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे”*

🙏🏻 *२. लक्ष्मी जी का मूल मंत्र जिसके द्वारा कुबेर ने परमऐश्वर्य प्राप्त किया था ।*

🌷 *“ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा”*

🙏🏻 *३. सरस्वती जी का वैदिक अष्टाक्षर मूल मंत्र जिसे भगवान शिव ने कणादमुनि तथा गौतम को, श्रीनारायण ने वाल्मीकि को, ब्रह्मा जी ने भृगु को, भृगुमुनि ने शुक्राचार्य को, कश्यप ने बृहस्पति को दिया था जिसको सिद्ध करने से मनुष्य बृहस्पति के समान हो जाता है ।*

🌷 *“श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा”*


             🌞 *~  पंचांग ~* 🌞

🙏🍀🌷🌻🌺🌸🌹🍁🙏

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