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Tuesday, September 20, 2022

श्री मंगलागौरी मंदिर धाम,शंकराचार्य आश्रम पोंडी रतनपुर शारदीय नवरात्रि महोत्सव की तैयारी जोर शोर से चल रही है।

 श्री मंगलागौरी मंदिर धाम,शंकराचार्य आश्रम पोंडी रतनपुर शारदीय नवरात्रि महोत्सव की तैयारी जोर शोर से चल रही है। 



रतनपुर से ताहिर अली की रिपोट



रतनपुर ....छत्तीसगढ़ के एक मात्र मंगलागौरी देवी मंदिर होने से नवरात्र पर्व पर देश विदेश के हजारों श्रद्धालु जन आकर माता जी के पूजन अर्चन करते है।


उल्लेखनीय है कि इस मंदिर और शंकराचार्य आश्रम की स्थापना गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर जगतगुरू अनन्त श्री विभूषित स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाभाग के कर कमलों से हुई हैं।शास्त्रों के अनुसार मंगलागौरी मंदिर ,कुँवारी और सुहागिन महिलाओं के लिए वरदान है।

शादी में हो रही बाधा को दूर करने वाली सन्तान सुख एवं अखण्ड सुहाग प्रदान करनेवाली मंगलागौरी के दर्शन पूजन मात्र से सौभाग्य की प्राप्ति हो जाती है। मङ्गल ग्रह की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण वर्ष भर मंगलीक वर कन्याओं का आना जाना लगा रहता है।

मंदिर एवं आश्रम के व्यवस्थापक महंत दैवज्ञ पंडित रमेश शर्मा ने बताया कि माता की मन्दिर 58 फिट ऊँची है।मन्दिर के भूतल पर माता जी का मंदिर है।माता मंगलागौरी नन्दी पर सवार है और माता जी के गोद मे भगवान गणेश जी है जिन्हें माता जी ने एक हाथ से संभाल रखा है ऐसे विलक्षण प्रतिमा पूरे विश्व में नही है। मन्दिर के ऊपर तल पर आदि गुरू शंकराचार्य भगवान का मन्दिर है जो पूरे विश्व का पहला मन्दिर है। आदि गुरू शंकराचार्य ने ही भारत देश के चारों दिशाओं में चारों धाम और चार पीठ की स्थापना की है। मन्दिर के बगल में यज्ञशाला स्थापित है जहां यज्ञ, अनुष्ठान के कार्यक्रम होते हैं। मंगलागौरी मन्दिर के दाई ओर चंद्रमौलेश्वर महादेव का मंदिर का निर्माणाधीन है। चंद्रमौलेश्वर महादेव आदि गुरु शंकराचार्य के साथ सभी शंकराचार्य के आराध्य देव है चंद्रमौलेश्वर भगवान  की पूजा किसी भी समय किसी भी दिन की जा सकती है क्योंकि भगवान राजराजेश्वर है।श्रद्धालुओं के लिए मन्दिर परिसर में तेल एवं धृत के मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए जाते हैं लगभग 351 ज्योति कलश प्रज्ज्वलित करने की व्यवस्था की गई है। रात में प्रति दिवस माता सेवा जस गीत प्रतियोगिता का आयोजन होगा जिसमें पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।  मन्दिर में 9 दिवस तक निशुल्क भंडारा की व्यवस्था है।। गोशाला में प्रतिदिन खीर पूड़ी की प्रसादी लगाई जाएगी। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए 8 कमरों से तीन बड़े हालो की व्यवस्था है।।

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