सदाबहार लोध,,जहां एक ओर किन्ही विसंगतियों के कारण जंगलों से लुप्त होने की कगार पर है।उसे कोरिया वन मंडल ने वृहद रूप देने इसे संरक्षित करने की ओर कार्य कर रहा है।आपको बता दें की औषधीय वृक्ष दहिमन,चंदन, हर्रा,बहेरा,आंवला इत्यादि के बाद कोरिया वन मंडल अब लोध के पौधों की नर्सरी तैयार करने में जुट गया है।,,आयुर्वेद की माने तो
लोध एक बहुत ही खास औषधीय वृक्ष है आयुर्वेद में इसके औषधीय गुणों की लंबी फेहरिस्त है।
लोध्र का वानस्पतिक नाम सिम्प्लोकास रेसीमोसा है। यह मुख्य रूप से ब्लीडिंग डिसऑर्डर, नेत्र विकार सहित कई असाध्य और गंभीर बीमारियों में उपयोग किया जाता है।
लोध्र के पेड़ उत्तर और पूर्वी भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में पाए जाते हैं। लोध्र का वृक्ष मध्यम ऊंचाई का होता है। इसके पत्ते 9 से 15 सेमी. लंबे होते हैं। इसके फूल खुशबूदार सफेद और काले रंग के होते हैं इस पेड़ की छाल भूरे रंग की होती है, जो औषधि गुणों से लवरेज होती है।लोध वृक्ष के छाल,पत्ते,बीज,सहित जड़ों का उपयोग कई बीमारियों में अलग अलग तरीके से उपयोग में लाई जाती है।
*CNI न्यूज़ से साहिल अंसारी की रिपोर्ट*
*कोरिया, बैकुंठपुर छत्तीसगढ़*




















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