पुरी शंकराचार्यजी के सानिध्य में चतुर्थ हिन्दू राष्ट्र सम्मेलन आज
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
कुरूक्षेत्र - आज से लगभग पच्चीस सौ वर्ष पूर्व शंकर दिग्विजय यात्रा अभियान के अंतर्गत भारत को एक सूत्र में पिरोने वाले आदि शंकराचार्यजी की पावन परम्परा में ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्द्धनमठ के 145 वें शंकराचार्य पुरीपीठाधीश्वर एवं हिन्दू राष्ट्र के प्रणेता अनन्तश्री विभूषित श्रीमज्जगद्गुरू शंकराचार्य पूज्यपाद स्वामी निश्चलानन्द सरस्वतीजी आदि शंकराचार्य महाभाग के पदचिन्हों का अनुसरण करते हुये पुनः अखण्ड भारत एवं हिन्दू राष्ट्र के लक्ष्य की पूर्ति हेतु विगत तीस वर्षों से भी अधिक समय से प्रत्येक वर्ष में 250 से भी अधिक दिनों तक राष्ट्रोत्कर्ष अभियान के अन्तर्गत पूरे भारत में जन- जागरण कर स्वस्थ वैचारिक क्रान्ति का सूत्रपात कर रहे हैं। भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के संकल्प की पूर्ति हेतु राष्ट्रोत्कर्ष अभियान यात्रा के अन्तर्गत उत्तरप्रदेश , महाराष्ट्र , उड़ीसा , छत्तीसगढ़ , गुजरात के अहमदाबाद , नई दिल्ली तथा हरियाणा प्रदेश में सोनीपत , करनाल , कैथल , अंबाला , युमनानगर आदि क्षेत्रों की यात्रा के बाद सैनी समाज भवन , ढाण्ड रोड , कुरुक्षेत्र में आज शाम पांच बजे से श्रीगोवर्द्धनमठ पुरी पीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती महाराज जी के पावन सान्निध्य में चतुर्थ हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन आयोजित है। जिस प्रकार स्वतंत्रता संग्राम के समय आमजनों ने भारत को आज़ादी दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ठीक उसी प्रकार भव्य भारत , अखण्ड भारत एवं हिन्दू राष्ट्र के निर्माण में अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुये इस अभियान में भी आगे बढ़कर अपना योगदान एवं भागीदारी सुनिश्चित करना होगा। गौरतलब है कि पिछले चातुर्मास्य के समय पुरी शंकराचार्यजी ने साढ़े तीन वर्षों में भारत की भव्य हिन्दू राष्ट्र के रूप में उद्भाषित होने की भविष्यवाणी की थी। उपरोक्त उद्घोषणा के क्रियान्वयन के एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है। हिन्दू राष्ट्र निर्माण की व्यूह रचना हेतु अब तक हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन के तीन चरण पूर्ण हो चुके हैं तथा चतुर्थ चरण के तहत हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन हरियाणा में आयोजित हो रहा है जिसमें देश विदेश के प्रतिनिधि भाग लेंगे तथा आगामी रूपरेखा पर पूज्यपाद पुरी शंकराचार्यजी के सानिध्य में चर्चा होगी। आज जब विश्व की सम्पूर्ण मानवता खतरे में है तब पुरी शंकराचार्यजी का संदेश है कि सनातन सिद्धान्त जो कि वर्तमान राकेट , कम्प्यूटर और मोबाइल के युग में प्रासंगिक है। उस सर्वकालिक सनातन सिद्धान्त को अपनाने के साथ साथ हमको उसके क्रियान्वयन की विधि भी सनातन सिद्धान्त पर आधारित रखना होगा तभी हम सार्थक परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। अन्यथा मन:कल्पित विधा के प्रयोग से विनाश ही परिलक्षित होगा। आईये सम्पूर्ण मानवता की रक्षा के लिये पूज्यपाद पुरी शंकराचार्यजी द्वारा संचालित इस दिव्य अभियान में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।


















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