समस्याओं को लेकर हुई सहमति के बाद भी कुछ कर्मचारी कर रहे हैं हड़ताल
पेराई को प्रभावित करने की जा रही है कोशिश
सीएनआई न्यूज़ बालोद से उत्तम साहू
बालोद। दंतेश्वरी मैया सहकारी शक्कर कारखाना में पेराई के कार्य को प्रभावित करने की कोशिश कुछ कर्मचारी के द्वारा की जा रही है। प्रबंधन के साथ कर्मचारियों की हुई बैठक में मुख्य मुद्दों पर सहमति बनने के बाद जो कर्मचारी प्रबंधन व किसानों के हित में काम करने कारखाना आ रहे हैं उन्हें इनके द्वारा लगातार धमकी दी जा रही है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में यूनियन के तथाकथित एक नेता जो जिले के बाहर के हैं उनके द्वारा पेराई के कार्य को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उक्त नेता द्वारा कर्मचारियों को भी बरगलाया जा रहा है।
करकाभाट स्थित बालोद जिले की एकमात्र शक्कर कारखाना दंतेश्वरी मैया सहकारी शक्कर कारखाना में गन्ना पेराई का काम आज बुधवार से शुरू किया जाना है। पेराई के पूर्व एक तरफ प्लांट को पूरी तरह से तैयार कर लिया गया है तो वहीं कर्मचारियों के हित को लेकर भी प्रबंधन ने पहले ही बैठक कर ली है। उक्त बैठक में प्लांट के कर्मचारी व प्रबंधन के अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में मुख्य रूप से वेतन वृद्धि सहित पांच मुद्दों पर चर्चा हुई जिसमें आपसी सहमति भी बनाई गई। इसके बाद प्लांट में बायलर पूजा व केन कैरियर पूजा की गई। दूसरी तरफ प्लांट के भीतर 40 से अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं तो कुछ कर्मचारी इसी बीच अपने निजी स्वार्थ को हित में रखते हुए हड़ताल कर रहे हैं। हड़ताल कर रहे कर्मचारियों द्वारा काम कर रहे कर्मचारियों को लगातार गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। इस संबंध में जानकारी के मुताबिक यूनियन की आड़ में एक तथाकथित बाहरी नेता हड़ताली कर्मचारियों के साथ मिलकर ना केवल पेराई के कार्य को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है बल्कि कर्मचारियों के हित को भी अनदेखा कर रहा है। उक्त नेता द्वारा कर्मचारियों को कई तरह से हड़ताल के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जबकि प्लांट में काम कर रहे कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि हमारी मुख्य मांगे प्रबंधन ने मान ली है। ऐसे में हड़ताल करने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।
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लगातार घाटे में चल रहा प्लांट
ज्ञात हो कि इस साल गन्ना पेराई का 14 सत्र हैं।प्रारंभ से ही शक्कर कारखाना घाटे में चल रहा है। प्रबंधन द्वारा घाटे को उबारने की कोशिश की जा रही है वही घाटे के बावजूद कर्मचारियों के हित में लगातार बेहतर फैसले लिए जा रहे हैं। इससे पूर्व भी कई बार कर्मचारियों की हड़ताल की गई जिसमें प्रबंधन ने सहानुभूति पूर्वक विचार कर मामला सुलझाया। इस बार भी गन्ना पेराई के काम में कोई व्यवधान ना हो इसलिए प्रबंधन ने पहले ही तैयारी कर ली थी। कर्मचारियों की बैठक में प्रमुख मांगों पर चर्चा कर पहले ही सहमति बना ली गई थी, इसके बाद भी कुछ कर्मचारियों द्वारा हड़ताल किया जाना समझ से परे है।
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यूनियन की आड़ में कुछ लोग सेक रहे अपनी रोटी
बताया जा रहा है कि शक्कर कारखाना में कुछ लोग ऐसे हैं जिनका काम सिर्फ नेतागिरी करना होता है। इनके द्वारा यूनियन की आड़ में बेवजह कर्मचारियों व प्रबंधन को परेशान किया जाता है। अधिकतर कर्मचारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि यूनियन द्वारा कर्मचारियों की समस्याओं को उठाया जाता है, लेकिन इस बार जब सहमति बन गई है तो हड़ताल करना उचित नहीं है। इसके पीछे कुछ लोगों का निजी हित हो सकता है।
कर्मचारी यूनियन के महासचिव नरेंद्र सिन्हा, हीरा पन्ना मिरझे, धर्मेंद्र सोनवानी, भूषण देशलहरे,भूपेंद्र साहू आदि ने कहा
कि प्रबंधन से समस्याओं को लेकर सहमति बन गई है।
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गन्ना उत्पादक किसानों का भी कहना हड़ताल अनुचित
इस संबंध में प्रबंधन समिति के अध्यक्ष बलदू राम साहू, गन्ना उत्पादक किसान संघ संरक्षक छगन देशमुख ,अध्यक्ष डॉक्टर तेजराम साहू,कृपा राम साहू,कृष्णा राम साहू,मनोहर सिन्हा आदि गन्ना उत्पादक किसान संघ के प्रमुख लोगों का भी कहना है कि ठीक गन्ना पेराई के समय कर्मचारियों द्वारा हड़ताल करना उचित नहीं है, यदि गन्ना पेराई प्रभावित किया जाता है या किसानों के हित पर किसी तरह का कुठारा घात किया जाता है तो किसान इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। किसानों का कहना है कि हड़ताल करना था या अपनी मांगे रखनी थी तो पहले रखनी थी, ठीक फसल कटाई व पेराई के समय व्यवधान से काम प्रभावित हो सकता है। इससे किसानों को भी नुकसान हो सकता है जो किसी भी स्थिति में किसी के लिए भी सही नहीं है।



















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