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Friday, February 24, 2023

कोटवारों का प्रदेशस्तरीय एक दिवसीय सांकेतिक धरना प्रदर्शन, मांग पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल

 राजनांदगांव 




कोटवारों का प्रदेशस्तरीय एक दिवसीय सांकेतिक धरना प्रदर्शन, मांग पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल



प्रदेश कोटवार एसोशिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ के आव्हान पर प्रदेश के सभी कोटवारों द्वारा एक दिवसीय सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया गया जिसमें कोटवारों की प्रमुख मांग कांग्रेस के सत्ता में आने से पहले विधानसभा 2018 के घोषणा पत्र में किये गये वादे तथा 2019 में पालन सम्मेलन में की गई घोषणा को पूरा करने किया गया है। कोटवारों की प्रमुख प्रमुख दो मांगे हैं जिसमें प्रदेश के कोटवारो को नियमतिकरण एवं कलेक्टर दर से पारिश्रमिक राशि दिए जाने तथा दूसरा मालगुजारी माफी जमीन का मालिकाना हक वापस दिलाने की प्रदेश सरकार से प्रमुख मांग है।


कोटवारों का कहना है कि कोटवार आजादी के पूर्व से पीढ़ी दर पीढ़ी ग्रामीण स्तर में रहकर अपनी सेवायें देतें आ रहे है परंतु सभी विभागो की चाकरी करने के बाद भी कोटवारो को शासकीय कर्मचारी का दर्जा नही मिल पाया है। लम्बे अवधि तक सेवा देने के बाद सेवा निवृत्ति होने पर कोटवारो को पेंशन ग्रेज्यूटी की सुविधा नही मिल पाती नाम मात्र के मानदेय से अपने परिवार का गुजर बसर करने में कोटवारो को भारी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वही झारखंड, उड़िया, महाराष्ट्र जैसे निकटवर्ती राज्यो में कोटवारो को नियमित कर्मचारी का दर्जा देकर उन्हें सम्मानजक वेतन देने के अलावा अन्य सुविधाएं भी दी जा रही है, परंतु छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में कोटवारो की स्तर बहुत ही दयनीय है। प्रदेश के कोटवारो को नियमतिकरण करते हुये कलेक्टर दर से पारिश्रमिक राशि देने की मांग की जा रही है। 


बतादें की कांग्रेस की 2018 के विधानसभा घोषणा पत्र में किये गये वादा में 23 फरवरी 2019 को कोटवारो के प्रांतीय सम्मेलन पाटन में यह आश्वासन दिया गया था कि स्वतंत्रता पूर्व (1950 के पूर्व) भूतपूर्व मालगुजार के द्वारा दी गई जमीन को आपके राजस्व मंत्री शासन काल में भूमि स्वामी हक दिया गया था। उक्त जमीन वापस छिन लिये गये है तो विधिवत् उसे कोटवारो के हक में दे दिया जावेगा परंतु आज पर्यन्त इस पर अमल नही हो पाया है बल्कि उल्टे कोटवारो के नाम राजस्व अभिलेखो से विलुप्त कर उसे शासकीय भूमि दर्ज किया जा रहा है। 

जिसके कारण कोटवार उनके दादा परदादाओ से माफी जमीन के रूप में मिली जमीन जिस पर उनके परिवार 100 वर्षो से भी अधिक समय से निर्वाद के रूप में काबिज है, बंधित हो रहे है। भू-राजस्व संहिता वांछिक संसोधन करने मात्र से कोटवार को उनके हक की जमीन वापस मिल जायेगी। जिसे शासन द्वारा किया जा सकता है, कर सकते है क्योकि सरकार ने बेजा कब्जाधारियो को जिस पर पीछले 20 वर्षो से काबिज है उन्हें भूमि स्वामी हक दिये जाने का भू-राजस्व संहिता में संसोधन कर प्रावधान लाया है।


(1) प्रदेश के समस्त कोटवारो को नियमितकरण करते हुये कलेक्टर दर पर पारिश्रमिक राशि का भुगतान किया जावे।

(2) मालगुजारो द्वारा 1950 के पूर्व दी गई माफी भूमि पर कोटवारो को भू-स्वामी हक वापस दिया जावे।

यदि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कोटवारों की इन प्रमुख मांगो को जल्द से जल्द पूरी नहीं किया जाता है तो छत्तीसगढ़ के कोटवार एसोसिएशन बाध्य हैं वह अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं इस प्रकार प्रदेश सरकार को कोटवार संघ द्वारा खुली चुनौती दी गई है।



सी एन आई न्यूज राजनांदगांव से रोशन कुमार पटेल की रिपोर्ट।

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