गरुड़ पुराण का महत्व
सी एन आइ न्यूज -पुरुषोत्तम जोशी
रायपुर-गरुड़ पुराण हिन्दू धर्म का एक प्रमुख ग्रन्थ है जिसे व्यास जी ने लिखा है। इस पुराण में मरने के बाद आपके द्वारा किये गये पापो के लिए दी जाने वाली सजा का वर्णन है। और इसके अलावा इस ग्रन्थ में अन्य जानकरिया भी दी गयी है जैसे पत्नी के क्या क्या कर्तव्य है आदि।
गरुड़ पुराण के अधिष्ठातृ देव भगवान विष्णु हैं, हिन्दू धर्म में कुल 18 पुराण है उन्ही मेसे एक गरुड़ पुराण है जिसमे कुल 18000 श्लोक, और 271 अध्याय है। गरुड़ पुराण भगवान विष्णु द्वारा उनके वाहन गरुड़ को सुनाई गयी थी।
गरुड़ पुराण को लेकर कई गलत धारणाएँ है जैसे कि कुछ लोगो का मानन है कि गरुड़ पुराण का पाठ करते समय आत्मा वहां उपस्थित होती हैं पर ऐसा नही है गरुड़ पुराण केवल ज्ञान का संचार करने के लिए पढ़ी जाती है और जिसकी मृत्यु हुई है उसके मोक्ष के लिए। गरुड़ पुराण का पथ किसी भी व्यक्ति के मरने के उपरांत किया जाता है क्योकि ऐसा करने से उसकी आत्मा को शांति मिलती है तथा सुनने वाले को ज्ञान की प्राप्ति होती है।
श्रीमती गणेशी बाई जोशी W/Oस्व. भगवती लाल जोशी के स्वर्गवास होने पर विधि-विधान के साथ परिवार वालों (नरेश जोशी, पुरुषोत्तम जोशी एवं दिनेश जोशी) द्वारा मृतात्मा की आत्मा को भगवान अपने चरणों में स्थान दे इस प्राथना के साथ *गरुण पुराण* का पाठ अपने निवास में रखा गया है ।
सभी परिवार के सदस्य एवं स्नेही जन शामिल होकर श्रद्धापूर्वक कथा का श्रवण २१-३-२३से ३०-३-२३ तक श्रवण कर मृतात्मा की शांति हेतु भगवान से प्रार्थना करेंगे ।



















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