अक्षय तृतीया के शुभ दिन से शुरू होगी केदारनाथ धाम की यात्रा
सी एन आइ न्यूज़ -पुरुषोत्तम जोशी ।
केदारनाथ मंदिर के खुलने की तिथि अक्षय तृतीया के शुभ दिन पर निर्भर करती है और हर वर्ष महाशिवरात्रि पर घोषित की जाती है।
और केदारनाथ यात्रा के समापन की तिथि भाई दूज दीपावली के बाद नवंबर के आसपास तय की जाती है ।
चार धाम यात्रा 2023 में केदारनाथ मंदिर के खुलने और बंद होने की तारीखें ।
खुलने की तिथि -25अप्रैल 2023।सुबह -6.20बजे।
अंतिम तिथी -14 नवंबर 2023।
भाई दूज के पूर्व संध्या ।
पवित्र केदारनाथ यात्रा हिन्दू तीर्थयात्रियों के बीच बहुत लोकप्रिय है,इस कारण हर साल लाखों की संख्या मेंश्रृद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं ।
केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित बारह ज्योतिर्लिंग में से एक है।यह पंच केदार में सबसे प्रसिद्ध मंदिर भी है।पंच केदार गढ़वाल हिमालय में 5 शिव मंदिरों का एक समूह है ।
इन मंदिरों के नाम केदारनाथ, तुंगनाथ, मध्यमहेश्वर, रुद्रनाथ और कल्पेश्वर है।
केदारनाथ धाम की यात्रा भी चार धाम यात्रा का हिस्सा है ।
केदारनाथ तीर्थ दूधिया सफेद मंदाकिनी नदी के पास एक लुभावने एवं मनमोहक स्थान पर, 3583 मीटर की उंचाई पर स्थित है ।
मई के माह में, केदारनाथ मंदिर देश भर के सभी श्रृद्धालुओं के लिए खोला जाता है ।देर शाम और रात में यहां का मौसम ठंडा रहता है और दिन के समय मौसम काफी सुहावना और साफ रहता है ।ऊंचाई वाले कुछ स्थानों पर हिमपात देखा जा सकता है ।
औसत तापमान लगभग 9.3 डिग्री सेल्सियस ।मिनिमम तापमान लगभग 3.8 डिग्री सेल्सियस ।अधिकतम तापमान लगभग 14.8 डिग्री सेल्सियस पर रहने की संभावनाएं हैं ।
गुप्तकाशी, फाटा ,और सेरसि ।
इन 3 स्थानों से हेलिकॉप्टर की सवारी से केदारनाथ धाम की यात्रा करने कि सुविधा उपलब्ध है ।
मान्यताओं एवं पौराणिक कथाओं के अनुसार केदारनाथ मंदिर का निर्माण भाई पांडवों द्वारा किया गया था ।लेकिन कहा जाता है कि
केदारनाथ मंदिर का आधुनिक संरचना 8 वी शताब्दी ईस्वी में हिन्दू गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा उसी स्थान पर बनाई गई थी, और माना जाता है की पांडवों ने एक शिव मंदिर का निर्माण किया था ।
केदारनाथ भगवान शिव मंदिर लगभग 3000हजार साल पुराना है ।साहित्यों में भी मंदिर के स्थापना कि सही तिथि का उल्लेख नहीं है ।लेकिन वैज्ञानिक प्रमाणो को देखे तो केदारनाथ की
न्यूनतम आयु लगभग 3000 वर्ष मानी जा सकती है ।
2013 में बाढ़ के दौरान मंदिर कि संरचना को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, इसके अलावा चार दीवारों के एक तरफ कुछ दरारें थी
जो उंचे पहाडो़ से बहने वाले मलबे
के कारण हुई थी ।आपदा के दौरान, बाढ़ में एक विशाल चट्टान ने बाधा के रुप में काम किया और मंदिर को व्यापक क्षति से बचाया ।शिलाखंड ने केदारनाथ मंदिर को
बचा लिया ।हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है की नष्ट न होने का कारण मंदिर की संरचना और निर्माण था।
*संकलित*


















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