मध्यप्रदेश सिवनीगणेशगंज बस स्टैंड में पानी की तलाश में भटक रहे लोग,भीषण गर्मी में नहीं है पीने के पानी की कोई व्यवस्था,पंचायत द्वारा नहीं कराई गई सार्वजनिक प्याऊ की व्यवस्थाकरीब 30 से 40 गांवों के लोग प्रतिदिन पहुंचते हैं गणेशग
सी. एन. आई. न्यूज सिवनी/गणेशगंज गर्मी की शुरुआत से ही सूरज तप कर धरती को गर्मा रहा है। बसंत को बीते अभी ज्यादा दिन नहीं हुए कि पारा 40 के पार पहुंच गया है तेज धूप और झुलसा देने वाले तपन में हर वक्त गला सूखा ही रहता है ऐसे में नेशनल हाईवे नंबर 7 के किनारे बसे गणेशगंज बस स्टैंड में कोई मुसाफिर चला आए तो प्यासा ही रह जाता है क्योंकि यहां प्याऊ का इंतजाम नहीं है, राहगीरों को मजबूरन पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है जो नहीं खरीद सकते हैं वह सरकारी नल हैंडपंप या प्याऊ की तलाश में इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।
*एक स्थान पर भी नहीं है प्याऊ का इंतजाम*
वैसे तो ग्राम पंचायत स्तर पर सार्वजनिक जगह पर प्याऊ लगाने की व्यवस्था पंचायत की होती है हर साल बस स्टैंड पर प्याऊ लगाया भी जाता है लेकिन इस पंचवर्षीय में नवनिर्वाचित पंचायत में बैठे जनप्रतिनिधियों का भीषण गर्मी में अभी तक इस ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं गया की सार्वजनिक जगहों पर प्याऊ की व्यवस्था करा दी जाए जबकि इन दिनों सुबह से लेकर देर शाम तक गणेशगंज क्षेत्र के आसपास करीब 30 से 40 गांव की महिलाएं व पुरुष बैंक व अन्य विभागीय कार्य सहित स्वयं के कार्यों के लिए गणेशगंज आते हैं जहां बस स्टैंड में पानी के लिए तरसने को मजबूर हैं हालात यह है कि गांव के लोगों को बस स्टैंड गणेशगंज में मजबूरन पीने का पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है लेकिन उनकी तकलीफ दूर करने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है।
*स्थानीय समाजसेवियों को भी नहीं है चिंता*
वैसे तो सार्वजनिक जगह पर प्याऊ लगाने की जिम्मेदारी जरूर पंचायत की होती है लेकिन कुछ हिस्सेदारी स्थानीय समाजसेवियों की भी नजर आती है जो चुनाव आते ही अपने आप को जनता के सेवक बताते फिरते हैं वह इस भीषण गर्मी में कहीं पर भी नजर नहीं आ रहे हैं।
जिसकी वजह से आसपास क्षेत्र के लोगों को मजबूरी बस या तो किसी होटल का सहारा लेना पड़ता है या फिर रुपए खर्च कर पाऊज या पानी की बोतल खरीदने को विवश होना पड़ रहा है। उसके बावजूद भी क्षेत्र के स्थानीय समाज सेवकों को ग्रामीण लोगों के लिए पानी की व्यवस्था करने में दिलचस्पी नहीं दिख रही है।
बस स्टैंड में प्याऊ की व्यवस्था ना होने से करीब 30 से 40 गांवों के लोग प्रतिदिन पीने का पानी के लिए यहां-वहां भटक रहे हैं लेकिन पंचायत के द्वारा कोई व्यवस्था नहीं की गई है जबकि मेरे द्वारा पंचायत कर्मियों से सार्वजनिक जगह पर प्याऊ खोलने का निवेदन भी किया गया लेकिन पंचायत कर्मी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
जिला ब्यूरो छब्बी लाल कमलेशिया


















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