शासन को गुमराह कर गांव को किया जा रहा बदनाम
शिकायत कर्ताओं के पर्याप्त मकान बाड़ी गांव के बस्ती में सुरक्षित,बेघर होने की दुष्प्रचार कर शासन को भ्रमित किया जा रहा
लोहराकोट आगजनी घटना को लेकर ग्रामवासी आक्रोशित हैं। पीड़ित परिवार द्वारा शासन प्रशासन के आंखों में धूल झोंककर गांव को बदनाम किया जा रहा है गांव अशांति फैलाने की षडयंत्र की जा रही है। कहते हैं हम लोगों के पास रहने के लिए मकान नहीं है पहनने के लिए कपड़ा नहीं है
इसी तरह कई प्रकार से झूठ बोलकर शासन प्रशासन को गुमराह में डाला जा रहा है ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार इन लोगों के पास स्वयं रहने के लिए पर्याप्त मकान बाड़ी लोहराकोट बस्ती के अंदर विगत 30 वर्षों से है। उन लोगों के नाम से बना हुआ मकान है इस वर्ष सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण में इनके मकानों में बकायदा सर्वे भी हुई है।
इसी बात को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस पर झूठी रिपोर्ट लिखने का आरोप लगाते हुए थाने का घेराव कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ जमीन दलालों के चक्कर में आकर ग्राम के कुछ लोगों द्वारा ग्राम की बेशकीमती जमीन पर कब्जा कर लिया गया था। जिसे ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर अतिक्रमण को खाली कराया गया था। जिसके विरोध में कुछ ग्रामीण उल्टा चोर कोतवाल को डांटे कहावत को चरितार्थ करते हुए। ग्रामीणों के खिलाफ झूठी रिपोर्ट दर्ज करा कर। जिला कलेक्टर से झूठी शिकायत कर ग्राम के उप सरपंच और उसके पति को फसाने की साजिश की गई है। जिस वजह से लोहराकोट के ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि ग्रामीणों का कहना है कि जिन लोगों ने पुलिस में जा कर रिपोर्ट दर्ज कराई है कि उनके मकान को ग्रामीणों ने तोड़ फोड़ कर जला दिया है। यह आरोप सरासर झूठा और निराधार है।जबकि 21 मार्च को प्रशासन की उपस्थिति में ग्रामीणों ने ग्राम प्रस्ताव पारित कर अतिक्रमण हटाया था। लेकिन कुछ साजिशकर्ताओं के द्वारा 27 अप्रैल को आग लगाकर पुलिस में झूठी रिपोर्ट दर्ज करा कर ग्राम के भोले भाले लोगों को फसाया गया है। वहीं पुलिस ने बिना जांच पड़ताल किए रिपोर्ट दर्ज कर लिया है। जिसके विरोध में ग्राम के सैंकड़ों ग्रामीण महिला पुरुषों ने सांकरा थाने का घेराव किया।
ग्रामीणों का कहना है ग्राम सभा ने पंचायत अधिनियम के तहत प्रस्ताव पारित कर अतिक्रमण हटाने का प्रस्ताव पास किया था। ग्राम सभा ने सारे नियम कायदे का पालन करते हुए उन अतिक्रमणकारियों के अतिक्रमण हटाएं हैं। जिनका पहले से ग्राम पंचायत क्षेत्र और अन्य स्थानों पर घर बने हुए हैं। लेकिन अतिक्रमणकारियों द्वारा जमीन दलालों के इशारे पर पुलिस अधीक्षक और जिला कलेक्ट्रेट जा कर झूठी शिकायत कर ग्रामीणों को फसाने की साजिश की गई है। शिकायत कर्ताओं ने पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर से शिकायत में हाई कोर्ट के स्टे का हवाला देते हुए कहा है कि ग्राम के कुछ लोगों द्वारा हाईकोर्ट के आदेश का उलंघन किया है। जबकि वास्तविकता इससे परे है। ग्राम सभा को हाईकोर्ट के स्टे की जानकारी बिलकुल भी नहीं थी। अगर स्टे जिला प्रशासन के अधिकारियों को थी तो स्टे की जानकारी ग्राम सभा को क्यों नहीं दी गई। जबकि ग्राम सभा ने अतिक्रमण हटाने की संपूर्ण जानकारी प्रशासन को दी थी।




















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