जिला सिवनी मध्यप्रदेश कृषि उपज मंडी में टैक्स चोरी,जिम्मेदारों पर उठ रहे सवाल
सी एन आई न्यूज/सिवनी यूं तो कहा जाए शिवनी की कृषि मंडी किसी कुबेर के खजाने से कम नहीं अब हम कुबेर का खजाना इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इस मंडी से रोजाना लाखों करोड़ों रुपयों का अनाजों का आय व्यय होता है आसपास के लगे हुए ग्राम से किसान यहां पर अनाज लाता है और अच्छी खासी शासन के नियमानुसार निर्धारित दर पर रेट पाता है किसान भी खुश है क्योंकि शासन ने जो उनके लिए जो रेट निर्धारित कर रखें चलिए यह तो बात मंडी जो भी किसी कुबेर से कम नहीं है अब आगे बात करते हैं इस मंडी के कार्यरत कर्मचारियों के बारे में लगातार 1 सप्ताह से दर्जनों समाचार पत्रों के माध्यम से यहां के कर्मचारियों का बखान हमें देखने सुनने पढ़ने को मिला इस पहल को हरिभूमि ने प्रारंभ किया था और सार्थक समाचार पत्रों ने बनाया मंडी कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि यहां पर रोजाना दर्जनों ट्रक अनाज से भरे हुए अन्य दूसरे राज्यों के लिए जाते हैं हमने इसका विवरण प्रथम अंक में किया था हमने बताया था कि टैक्स चोरी की जा रही है अब हमने यह कहा क्यों कहा यथार्थ सत्य है कि 1 शासकीय कर्मचारी महीने के प्रारंभ में उसके पास जैसे ही तनख्वाह आती है तो सारे शौक घर का किराना घर की ईएमआई बच्चों के कपड़े बच्चों की स्कूल की फीस बच्चों के बस का किराया पूरे करता है महीने का 15 दिन जेब में तंगी और तारीख 28 29 आते ही जेब खाली हो जाता है फिर वह इंतजार करता है तनख्वाह लेकिन यहां पर साहब कुछ अलग ही है मंडी कर्मचारियों पर अगर हम नजर डालें तो आलीशान महल खड़े कर रखे हैं सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ऐसी रोड जहां पर ₹5000 स्क्वायर फीट के हिसाब से जमीन मिलती है वहां पर इन कर्मचारियों के आलीशान complex बना रहे है कुछ के तो निर्माण हो चुके 1 ईमानदार शासकीय कर्मचारी की पूरी जिंदगी बीत जाती है तब जाकर मैं अपने लिए एक घर बना पाता लेकिन यहां पर कार्यरत कर्मचारियों के एक ही नहीं दो तीन आलीशान बंगले बने हुए हैं सोचने का विषय है आखिर इतनी बेशुमार दौलत आई तो कहां से आई कृषि मंडी को लेकर भोपाल की एमडी मैडम के द्वारा विगत कुछ माह पहले टीम भेजी गई थी उस टीम के द्वारा कार्यवाही भी की गई लेकिन जैसे ही टीम रवाना हुई तो स्थिति जस की तस हो गई बोल बाला सिक्का फिर से इन कर्मचारियों का चलने लगा शासन का टैक्स शासन को ही जाए जिससे आम जनता का भला होता है यदि वह टैक्स शासन को नहीं जाता किसी व्यक्ति विशेष को जाता है तो उससे किसी व्यक्ति विशेष का भला होता है समय रहते आला अधिकारियों को इस पर संज्ञान लेना चाहिए जिससे शासन का टैक्स शासन को भी मिले रोजाना दर्जनों ट्रक जिसका कोई भी लेखा जोखा शासकीय कागजों में नहीं होता उसके बावजूद भी बाॅर्डर पार कर दिए जाते हैं विचारणीय तथ्य है आखिर इसमें ना जाने कितने लोग हैं जो कि इस काम को अंजाम दे रहे हैं सारा खेल व्हाट्स एप पर उक्त ट्रक का नंबर दे दिया जाता है जिसको बाॅर्डर पार करवाना है सूत्रों प्राप्त खबर के अनुसार एक ट्रक से लगभग 5 से र 10000 लिए जाते हैं और दिन भर में दर्जनों ट्रक बाॅर्डर पार कर दिए जाते हैं छब्बी लाल कमलेशिया ख़ास रिपोर्ट


















No comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box.