14गढ राजमातावाली माता जी मंदिर मे ज्योति क्लश की स्थापना...
इस मंदिर का इतिहास की बात करे तो यह कहाजाता है कि
मोहला के वार्ड नम्बर 10 पर स्थित खडगांव रोड जगह पर स्थित मंदिर पर,पानाबरस राज के समय
से लयहांहाथी बांधा जाता था,।
हाथी की मृत्यु के बाद इस स्थान पर तीन हाथी को दफनाने के कारण हाथी गुड़ी के , नाम से इस अंचल मे प्रसिद्द रहा। दफनाते वक्त अंचल मे बाजा गाजा मांदरी नृत्यकेसाथ स्व.लालश्याम शाह महराज जी कर कमलो से 360गांव से हजारो की भीड़ की संख्या शामिल रही। अन्न व धन देकर 10फीट गहरे गढ्डे मे हाथी को दफनाया गया।
हाथी का नाम पदमा वती था इसलियेयह मंदिर स्व. पदमावती के नाम से जाना जाता है। इसे 14गढराजवाली माताजी के नाम से जानाजाता है। कहाजाता हैकि हाथी रखना पूराने समय मे शक्ति व समृद्दि का प्रतीक के रूप मे माना जाता रहा। गढवाली, राजवाली दंतेश्वरी माता को सवारी के रूप मैभी देखाजाता है। इस अचल मे प्राय:सभी मंदिरो मे घोडा हाथी विराजमान है।
इसमंदिर का निर्माण जनसहयोग व 360गांव के लोगो कीभावनाओ कोदेखते हुये 13/10/2015 को किया गया।
जिसका लोकार्पण, राजमाता स्व. श्रीमतिमनमोहनीदेवीशाह
,सुपौत्रलक्ष्मेन्द्र शाह बाबा पानाबरस(मोहला).
राजबैगा श्री बिसनाथ सिंह बोगातोलुम, नोहरूराम कुमेटी, राजिमशाहमरकाम पानाबरस ,ग्राम पटेल ,मांझी,व ठाकुर क्षेत्रवासियो के आतिथ्य मे हुआ।
नवरात्र पर्व पर प्रतिदिन पूजाअर्चना, मोहन बोगा, दुलार सिंग नेताम,गंगाराम तारम के द्दारा किया जा रहा है।
*मोहला से योगेन्द्र सिंगने की रिपोर्ट*


















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