, सोमवार 11 दिसंबर 2023
कांग्रेस विधायकों पर भारी पड़ेंगे भाजपा के पराजित प्रत्याशी ?
शैडो विधायक के रूप में रहेगी हर कामकाज में दखलंदाजी
विधानसभा चुनाव में अविभाजित राजनांदगांव जिले पांच सीटों पर भले ही कांग्रेस प्रत्याशियों ने बाजी मार ली है, लेकिन प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के कारण पराजित भाजपा प्रत्याशियों की भूमिका किसी निर्वाचित विधायक से कम नहीं रहेगी। इस तरह भाजपा के हारे हुए प्रत्याशी शैडो विधायक की भूमिका में रहकर कांग्रेस विधायकों के लिए चुनौती खड़ी करते रहेंगे। इससे कांग्रेस के निर्वाचित विधायकों का जो तेवर नजर आना चाहिए, वैसा कुछ नहीं होने वाला है।
जानकारों का मानना है कि कांग्रेस प्रत्याशियों के हाथों पराजित हुए भाजपा के उम्मीदवार अगले पांच साल तक शैडो विधायक की भूमिका अदा करते प्रशासनिक कामकाजों में सीधी दखल रखेंगे। ऐसी स्थिति में कांग्रेस के निर्वाचित विधायकों को अपने क्षेत्रों के विकास के मामलों में राजनीतिक टकराव का सामना करना पड़ सकता है। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अविभाजित राजनांदगांव जिले की छह में से पांच सीटें गंवा दी है। राजनांदगांव विधानसभा से डॉ. रमन सिंह ही एकमात्र भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुने गए हैं। पांच सीटों पर
कांग्रेस का कब्जा हो गया है। इन
सीटों में सबसे कम अंतर में डोंगरगांव सीट पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। दूसरे कम अंतर वाली सीट खैरागढ़ रही। मोहला मानपुर, खुज्जी और डोंगरगढ़ में कांग्रेस ने भारी अंतर से भाजपा के प्रत्याशियों को पराजित कर दिया। डोंगरगांव से भाजपा प्रत्याशी भरत वर्मा 2700 वोटों से परास्त हुए, जबकि खैरागढ़ से विक्रांत सिंह पांच हजार मतों से पीछे रह गए। अब प्रदेश में सरकार बनने के बाद कहा जा रहा है कि भाजपा के बैनर तले हार का सामना करने वाले सभी उम्मीदवार शैडो विधायक के तौर पर कामकाज करने का मन बना चुके हैं। राज्य में भाजपा शासन लौटने के बाद शैडो विधायक अपनी दखल रखने की तैयारी में हैं। माना जा रहा है कि कुछ प्रत्याशी प्रशासनिक पकड़ रखने के लिए जोर लगा रहे हैं। कांग्रेस के विधायकों को ऐसी स्थिति में राजनीतिक परेशानी उठानी पड़ सकती है। सरकार नहीं होने का खामियाजा कांग्रेस विधायकों को की
भुगतना पड़ सकता है।
प्रदेश में भाजपा सरकार के
सत्तासीन होने से विजयी हुए कांग्रेस
विधायक अगले पांच साल तक
राजनीतिक संकटों से जूझते रहेंगे।
उसके बाद बाकी कसर को शैडो
विधायक के रूप में काम करने वाले
भाजपा के हारे प्रत्याशी पूरा करेंगे। सियासी गलियारों में चर्चा सरगर्म है कि भाजपा के पराजित प्रत्याशी कांग्रेस विधायकों की मनमानी नहीं चलने देंगे। ऐसी स्थिति में यह साफ है कि सभी विधानसभा क्षेत्रों में टकराव की स्थिति स्वभाविक रूप से बनेगी और कांग्रेस विधायकों की परेशानी बढ़ने के साथ ही आम जनता का कोई कामकाज नहीं करा पाने की स्थिति में उन्हें जनता के आक्रोश का भी सामना करना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि खुज्जी सीट से भोला राम साहू कांग्रेस से तीसरी बार विधायक चुने गए हैं, लेकिन उनका यह दुर्भाग्य है कि वह जब-जब विधायक बने, तब-तब उन्हें विपक्ष में ही रहना पड़ा। यही वजह रही कि वे दो बार विधायक रहकर अपने निर्वाचन क्षेत्र में कोई उल्लेखनीय काम नहीं करा पाए। उस दौरान उनके पास अपनी समस्याओं को लेकर गुहार लगाने वालों को भोलाराम साहू यही कहकर आश्वस्त करते रहे कि अभी तो अपनी सरकार नहीं है। हम तो विपक्ष में हैं। कोशिश करेंगे कि आपका काम हो जाए। वर्तमान में भी श्री साहू के साथ वहीं परिस्थितियां फिर विद्यमान हैं, ऐसे में उन्हें पुनः यही कहते सुनाजा सकता है कि हमारी तो सरकारही नहीं है, देखते हैं।
मोहला से योगेन्द्र सिंगने की रिपोर्ट


















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