खैरागढ़ छुईखदान गंडई।
गंडई में साहित्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया
डोंहड़ी साहित्य समिति गंडई द्वारा नववर्ष की पावन बेला पर आज सरस्वती शिशु मंदिर गंडई में साहित्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया
जिसमें अंचल के वरिष्ठ साहित्यकार डाँ.पीसीलाल यादव ने वर्तमान समय में छत्तीसगढ़ी भाषा में साहित्य सृजन पर प्रकाश डालते हुए प्रकाशित पुस्तकों और उनके रचनाकारों का उल्लेख करते हुए सभी रचनाकारों को इन पुस्तकों को अधिक से अधिक पढ़ने के लिए प्रेरित किया साथ ही आज की विसंगतियों को ईशारा करती हुई उनकी कविता,"बोलो लोकतंत्र की जय" ने सबका ध्यान आकृष्ट किया।डाँ.माघी लाल यादव की कविता "जिंदगी हो जाय सुहानी नये साल में "सबका मन मोह लिया। राजकुमार मसखरे ने अपनी चिर-परिचित अंदाज में जाड़ पर कविता सुनाई, लच्क्षू यादव ने मां की ममता पर अपनी कविता सुनाई। कु.श्रद्धा यादव और कु.लता साहू ने बेटी पर अपनी सुमधुर गीत कविता का वाचन किया। चिंता राम ध्रुवे ने हसदेव जंगल पर और तुलेश्वर सेन ने वर्तमान समाजिक बुराई पर प्रस्तुति के माध्यम से छाप छोड़ी। टीका राम देशमुख नेअपनी कविता से एक नया सामाजिक संदेश दिया वहीं टीकाराम ध्रुवे ने गीत पढ़कर मन मोह लिया । मुकेश साहू की कविता युवा शक्ति की प्रस्तुति थी वहीं शशांक यादव ने चिरई खोंधरा के माध्यम से मानव जीवन पर, संजू उइके ने वर्तमान चिंतन पर, नवकलमकार हेमंत मसखरे और सेवक राम जंघेल ने भी अपनी नई कविता सुनाकर सबको भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम का संचालन कर रहे कमलेश शर्मा बाबू ने अपनी कविता "सुनलव सुनावंव जी मोर मन के गोठ" गाकर कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिया।



















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