युवाओ को गुरु और युवतियों को गौरी का पूजन करना सिखाती है रामचरितमानस संत श्री राम बालक दास जी
छत्तीसगढ़ से संजू महाजन की रिपोर्ट
12 अप्रेल,,
वनांचल क्षेत्र जिला कवर्धा के कुई कुकदूर में आयोजित पांच दिवसीय श्री राम कथा महोत्सव के चतुर्थ दिवस में छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध संत पाटेश्वर धाम के श्री राम बालक दास महात्यागी जी ने श्री राम जानकी के प्रथम मिलन पुष्प वाटिका की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि श्री रामचंद्र अपने गुरु के पूजा के लिए पुष्प लेने वाटिका में आते हैं और माता भगवती सीता अपनी मां की आज्ञा से गौरी पूजन के लिए पुष्प वाटिका में आती है ,
जब युवा गुरु के आदेश पर चले और युवतियां कुल की मर्यादा में रहे तो सीताराम जैसे परिवार का निर्माण होता है इसीलिए संपूर्ण विश्व में श्री सीताराम जी की जोड़ी प्रसिद्ध है आज के समय में भी सीताराम जी का गृहस्थ जीवन अनुकरणीय है एक दूसरे की प्रति समर्पण होना ही परिवार की धुरी होती है आज समाज में फैले हुए विषमता के बारे में भी कटाक्ष करते हुए संत श्री ने कहा कि भगवान राम सदा समरसता के पक्षधर रहे जाति पाति उच नीच छुआछूत का भेद मिटाकर संपूर्ण भारत को एक सूत्र में बंधना होगा तभी सनातन सुरक्षित होगा और भारत हिंदू राष्ट्र होगा कुई में चल रहे राम कथा का कल पंचमी तिथि को समापन दिवस है इस अवसर पर समिति ने अधिक से अधिक संख्या में श्रद्धालुओं को आने का निमंत्रण दिया


















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