गोंदिया में पहली बार डॉ. नोव्हिल ब्रम्हणकर ने कैंसर ग्रस्त ब्लाडर का 8 घंटे की सफल शल्य क्रिया कर कृत्रिम ब्लाडर का निर्माण 55 वर्षिय महिला को दिया नया जीवन दान
आयुष्मान योजना के अंतर्गत ब्राह्मणकर हॉस्पिटल में महिला मरीज का उपचार
गोंदिया- शहर का ब्राह्मणकर हॉस्पिटल आयुष्मान भारत वह महात्मा ज्योतिबा फुले योजना के अंतर्गत मरीजो का सफल उपचार कर उन्हें जीवन प्रदान कर रहा है। जिसमें कैंसर ग्रस्त मरीजों के उपचार बड़े पैमाने पर हो रहे हैं। पड़ोसी जिले मध्य प्रदेश निवासी 55 वर्षीय महिला के ब्लाडर (मूत्राशय की थैली) 4 वर्षो से कैंसरग्रस्त थी।
जिसका 8 घंटे तक चले लेप्रोस्कोपी ऑपरेशन में कैंसर ग्रस्त ब्लाडर को निकलकर कृत्रिम ब्लाडर का निर्माण गोंदिया शहर में पहली बार डॉक्टर नोव्हिल ब्राह्मणकर द्वारा सफलतापूर्वक कर कीर्तिमान रचते हुए महिला को एक नया जीवन दिया।
कैंसर की बीमारी आज भी मरीज के लिए जानलेवा बनी हुई है किंतु यदि प्राथमिक चरण में बीमारी का पता लग जाता है तो उसका उपचार कर काफी हद तक मरीज की जान बचाई जा सकती है। आधुनिक परिवेश में कैंसर विभिन्न रूपों में सामने आता है इसी प्रकार का एक मामला गोंदिया शहर के प्रसिद्ध ब्राह्मणकर हॉस्पिटल में सामने आया जिसमें गोंदिया जिले से लगे पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश बालाघाट के छोटे से गांव की निवासी 55 वर्षीय महिला जो 4 वर्षों से ब्लाडर (मूत्राशय की थैली) के कैंसर से ग्रस्त थी। शुरुआत में कोविड कल शुरू रहने के चलते बीमारी सामने आने पर उपचार में काफी परेशानियों का सामना पीड़ित महिला वह परिजनों को करना पड़ा।
प्राथमिक उपचार नागपुर में करवाया लेकिन इस उपचार में बड़े शहरों में जाना और अधिक पैसा खर्च होना यह परिवार की स्थिति में नहीं था।
वर्ष 2020 में बीमारी के सामने आने पर डॉक्टर ब्राह्मणकर से भी इसकी जांच करवाई गई थी किंतु इसके पश्चात नागपुर के एम्स व अन्य अस्पताल में पीड़ित द्वारा अपना उपचार करवाया गया। इस दौरान महिला को अनेकों बार कीमोथेरेपी का उपचार भी दिया गया लेकिन इससे महिला मरीज को किसी भी प्रकार का लाभ नहीं मिल रहा था।
जिसका एकमात्र उपाय यह था कि महिला ब्लाडर (मूत्राशय की थैली) को निकालकर नए कृत्रिम ब्लाडर का निर्माण किया जाए लेकिन यह जटिल शल्य क्रिया मुंबई, हैदराबाद, दिल्ली जैसे महानगरों में ही की जा सकती थी।
इसके पश्चात महिला मरीज के परिजनों द्वारा डॉक्टर नोव्हिल ब्राह्मणकर से संपर्क कर संपूर्ण वस्तु स्थिति सामने रखी जिस पर डॉक्टर नोव्हिल द्वारा इस जटिल शल्य क्रिया को करने का निश्चय किया व आपरेसन शासकीय योजना आयुष्मान भारत के अंतर्गत करने की मंजूरी ली गई।
आयुष्मान योजना के अंतर्गत उपचार करने की अधिकृत मंजूरी मिलने के पश्चात महिला मरीज की शल्य क्रिया की प्रक्रिया शुरू की गई तथा यह जटिल ऑपरेशन करीब 8 घंटे तक चला।
यह शल्यक्रिया लेप्रोस्कोपी से कर कैंसर ग्रस्त सभी सेल को सफलतापूर्वक बाहर निकल गया तथा इसके पश्चात शरीर की अन्य अतड़ियो की सहायता से कृत्रिम ब्लाडर का निर्माण किया गया जिससे महिला को इस जानलेवा बीमारी की असहनीय पीड़ा से निजात मिली। वह महिला को डॉक्टर ब्राह्मणकर द्वारा एक नया जीवन दिया गया।
ब्लाडर कैंसर के प्रमुख लक्षण
ब्लाडर में कैंसर होने पर इसके
साथ ही शासकीय योजनाओं का पूर्ण रूप से लाभ दिया जिसके लिए डॉक्टर ब्राह्मणकर वह शासकीय योजनाओं का लाभ मिलने पर सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद व आभार व्यक्त किया। सतीष पारधी कि रिपोर्ट



















No comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box.