लाखों रुपए खर्च लेकिन खाना होगा बिना दरी के ज़मीन में बैठ कर
पामगढ़ ब्लॉक के मुड़पार स्कूल का बेहद चिंताजनक माहोल
घर में अपने बच्चे के लिए आलिशान डाइनिंग टेबल लेकिन सरकारी स्कूल में दरी तक नसीब नही
सरकार सरकारी स्कूल को बेहतर से बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है लेकिन जमीनी स्तर में सन्नाटा पसरा है लाखों रुपए खर्च भी कर रही है लेकिन पैसा जाता कहा है इसका कोई हिसाब नही है पैसा अधिकारी खा जाते हैं या नेता यह समस्या एक ही स्कूल का नही है बल्कि प्रदेश के अधिकांस स्कूल का है कही स्कूल जर्जर हालात में पड़े हैं तो कहीं पढ़ाने के लिए बोर्ड तक नहीं हमने सर्वे के दौरान कुछ स्कूलों में सरकार के विकास और स्कूल के जमीनी स्तर को जानने की कोशिश की है लेकिन कुछ बेहतर हासिल नही हुआ बच्चो को हिंदी अंग्रेजी पढ़ने तक नही आता वही मध्यान्ह भोजन की बात करें तो तो हर माह उक्त योजना के लिए पैसा आता है लेकिन मेन्यू के हिसाब से खाना नही मिलता, बच्चों को बैठने के लिए दरी तक नसीब नही होता बरसात में भी बच्चे ज़मीन में बैठ कर खाना खाते नज़र आए कुछ स्थानों में पंखा बिजली तक की सुविधा नही हैं शौच के लिए भी बच्चे घबरा रहे हैं बाहर जाना पड़ता है गांव के शाला विकास समिति के सदस्य भी मौन है जिससे स्कूल प्रबंधन में स्कूल के शिक्षक मनमानी कर रहे है और ब्लॉक के तथा जिला के शिक्षा अधिकारी में इसमें संज्ञान लेने में कोताही बरत रहें हैं ऐसे में सरकारी स्कूल का स्तर गिरता जा रहा है लोग निजी विद्यालय की ओर रुचि दिखा रहे हैं।
जांजगीर से विक्रम कुमार की खास रिपोर्ट
8319723675



















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