बानकेरा / महासमुंद।
बावनकेरा के दो छोटे बच्चे रख रहे हैं रमजान माह का पवित्र रोजा। नन्हे रोजदार इल्मा फातिमा 6 वर्ष पिता अनीश खान कामिल रज़ा 6 वर्ष पिता शकील खान।
रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है, जो मुसलमानों के लिए बहुत पवित्र और महत्वपूर्ण है। इस महीने में मुसलमान रोजा रखते हैं, जो इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है।
रमजान का महत्व इस प्रकार है:
1. _रोजा_: रमजान के महीने में मुसलमान रोजा रखते हैं, जो सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक किया जाता है। रोजा रखने से मुसलमान अपने शरीर और आत्मा को शुद्ध करने का प्रयास करते हैं।
2. _कुरान की तिलावत_: रमजान के महीने में मुसलमान कुरान की तिलावत करते हैं, जो इस्लाम की पवित्र पुस्तक है। कुरान की तिलावत करने से मुसलमान अपने धर्म के बारे में जानने और अपने जीवन को सही दिशा में ले जाने का प्रयास करते हैं।
3. _नमाज_: रमजान के महीने में मुसलमान नमाज का विशेष महत्व देते हैं। नमाज करने से मुसलमान अपने अल्लाह के साथ जुड़ने और अपने जीवन को सही दिशा में ले जाने का प्रयास करते हैं।
4. _जकात_: रमजान के महीने में मुसलमान जकात देते हैं, जो गरीबों और जरूरतमंदों की मदद के लिए दिया जाता है। जकात देने से मुसलमान अपने समाज की मदद करने और अपने जीवन को सही दिशा में ले जाने का प्रयास करते हैं।
5. _इफ्तार और सहरी_: रमजान के महीने में मुसलमान इफ्तार और सहरी का विशेष महत्व देते हैं। इफ्तार करने से मुसलमान अपने रोजा को तोड़ने और अपने परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने का प्रयास करते हैं। सहरी करने से मुसलमान अपने रोजा की तैयारी करने और अपने दिन की शुरुआत करने का प्रयास करते हैं।
रमजान के महीने में मुसलमान अपने जीवन को सही दिशा में ले जाने और अपने अल्लाह के साथ जुड़ने का प्रयास करते हैं। यह महीना मुसलमानों के लिए बहुत पवित्र और महत्वपूर्ण है।


















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