60 बच्चे 19 विषय दो शिक्षक क्या पढ़ाई हो पायेगा
प्रधान पाठक नहीं अल्ला दिन का कोई चिराग हो जो सब कुछ तुरंत करो
दिन भर आंखी गड़िया के मोबाइल देखो और तुरंत जवाब बनाकर जमा करो
छत्तीसगढ़। वर्तमान छत्तीसगढ़ सरकार और उनके अधिकारियों के द्वारा युक्तियुक्तकरण करते हुए प्रत्येक प्राथमिक शाला जहां पर 60 बच्चे दर्ज हैं वहां पर मात्र दो शिक्षक रहेंगे एक प्रधान पाठक और एक सहायक शिक्षक हम आप आम जनता से पूछना चाहते हैं कि क्या वहां पर पढ़ाई सुचारू रूप से हो पायेगा जबकि कक्षा पहली से पांचवी तक 19 विषय पाठ्यक्रम के रूप में और मुस्कान पुस्तकालय शामिल हैं सरकार आखिर क्या चाहती है आप सभी को बताना चाहेंगे कि आन लाइन और आफ लाइन लगभग 100 से अधिक कार्य चलाए जा रहे हैं जैसे मध्यान्ह भोजन उपस्थिति, पाठयपुस्तक की जानकारी, स्कूल ड्रेस की जानकारी , पेड़ पौधे की जानकारी, शासन से मिलने वाली सामग्री की जानकारी, स्कूल में उपलब्ध संसाधन की जानकारी, आपार आई डी की जानकारी,छात्र वृत्ति की जानकारी,आन लाइन और आफ लाइन ट्रेनिंग प्रशिक्षण , एफ एल एन,पढ़ाई तुम्हार दुवार, शिक्षक , स्वीपर, रसोइयों को मेंटेन की जानकारी, शाला कैलेंडर के अतिरिक्त अनेकों एन जी ओ का दखल,पाठ्य पुस्तकों का बार कोड से स्कैन करना,प्रत्येक बच्चों के पाठ्य पुस्तकों में संस्था का 10 पेज पर सील लगाओ,एक पेड़ मां के नाम,स्वास्थ्य परीक्षण कराओ,नाम जोड़ो कांटो जिनका भी संचालन करना एक शिक्षक दिन सुबह शाम तक मोबाइल में व्यस्त हो जाता है क्योंकि प्राथमिक शाला में कोई अलग से बाबू या कर्मचारी नहीं होता है प्राथमिक शाला के शिक्षकों का जीवन को एक चपरासी से बत्तर बना दिया गया है माता पिता और बच्चे कहते हैं शिक्षक पढ़ाता नहीं हैं शिक्षक पढ़ाना चाहते हैं सरकार उन्हें पढ़ाने नहीं दे रही है दुनिया भर के कामों में उलझा कर रख दिया है शिक्षक चौथी पांचवी में जाता है तो पहली दूसरी तीसरी खाली और उधर जाता है तो चौथी पांचवी खाली हो जाता है।सरकार से पूछना चाहते हैं कि क्या केवल भौतिक संसाधन बिल्डिंग,भवन,शौचालय,मैदान,खेल समान आदि देने से पढ़ाई पूरा हो जाएगा,शिक्षा विभाग के द्वारा विज्ञापन बाजी में जो पैसा खर्च किया जाता है वह बंद और सभी कक्षाओं और दर्ज अनुसार प्राथमिक शाला में न्यूनतम चार शिक्षक हों प्राथमिक शाला ही हमारा नींव होता है और वहीं कमजोर हो रहा है तो हम किस बुनियाद पर कह सकते हैं कि हमारे बच्चे स्कूल में पढ़ लिख रहे हैं केवल वोट बैंक की राजनीति हो रही बच्चे स्कूल आए अपना नाम गांव लिखना सीख जाए वह अनपढ़ न रहे ।पढ़ लिख लेगा तो अंदर बाहर की जानकारी रखने लग जाएगा नौकरी मांगेगा तब क्या करेंगे ।माता पिता लोग एक रुपया की मुफ्त की चांवल को प्राथमिकता दे रहे हैं पढ़ाई लिखाई से उन्हें कोई मतलब नहीं है ।शिक्षक को अल्ला दिन का चिराग और अली बाबा के चालीस चोर खुल जा सिम सिम बना डाला है शिक्षक सुबह दस बजे जाए और शाम चार बजे तक कोल्हू के बैल की तरह कार्य करे स्कूल में पढ़ाए लिखाए मत ऊपर कार्यालय से मिलने वाली आदेशों का जी हुजूरी करे पोस्टमैन बनकर चिट्ठी का जवाब देते रहे। बड़े बड़े अधिकारीयों और नेताओं के बच्चे तो प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं यहां तक स्कूल के पार्टनर होते हैं शिक्षा को बिजनेस बना लिए हैं उन्हें क्या मतलब गांव के अनपढ़ गरीब,मजदूर के बच्चें कैसे पढ़ते हैं वे लोग ही हमारे बच्चों का भविष्य अंधकारमय बना रहे हैं पांच साल में एक बार आते हैं चुनाव के समय दारू, गांजा पैसा,गहना बांटकर जीत जाते हैं सरकार बना लेते हैं उनके बच्चे तो विदेशों में पढ़ते हैं नेताओं के बच्चों को नेता बनाकर हम सब चमचागिरी कर रहे उनके सामने माथा टेक रहे गुलाम बन रहे हैं।प्राथमिक शाला में नींव को मजबूत करना है तो प्रत्येक स्कूल में कम से चार से पांच शिक्षक जरूरी है दर्ज संख्या अनुसार।।



















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