अजा एकादशी आज का दिन पूर्णतया जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित होता है, कथा सुनने से अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य फल मिलता है।
सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी।
अजा एकादशी का हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व है। यह एकादशी भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन साधक कठिन व्रत रखते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। वहीं, इस दिन दान और पुण्य का बड़ा महत्व है। इस साल हिंदू पंचांग के अनुसार, 19 अगस्त को अजा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। व्रत के साथ-साथ इस दिन देवी तुलसी की पूजा भी जरूर करनी चाहिए। वहीं, इस दिन तुलसी चालीसा का पाठ परम कल्याणकारी माना गया है।
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन अजा एकादशी मनाई जाती है। यह दिन पूर्णतया जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित होता है। अतः अजा एकादशी के लिए साधक न केवल आराध्य भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, बल्कि उनके निमित्त व्रत भी रखते हैं। इस व्रत को करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही देवी मां लक्ष्मी की कृपा से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
अजा एकादशी शुभ मुहूर्त-
वैदिक पंचांग के अनुसार, 18 अगस्त को शाम 05 बजकर 22 मिनट पर भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि प्रारंभ होगा। वहीं, 19 अगस्त को दोपहर 03 बजकर 32 मिनट पर एकादशी तिथि का समापन होगा। सनातन धर्म में उदया तिथि से गणना की जाती है। इस प्रकार 19 अगस्त को अजा एकादशी मनाई जाएगी। वहीं, 20 अगस्त के दिन अजा एकादशी का पारण किया जाएगा।
अजा एकादशी पारण समय-
अजा एकादशी का पारण 20 अगस्त को किया जाएगा। इस दिन साधक सुबह 05 बजकर 15 मिनट से लेकर 07 बजकर 49 मिनट के मध्य पारण कर सकते हैं। एकादशी व्रत का पारण अन्न और धन का दान कर किया जाता है। इसके लिए द्वादशी तिथि पर स्नान-ध्यान के बाद भक्ति भाव से लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करें। वहीं, पूजा के बाद अन्न का दान कर व्रत खोलें।
अजा एकादशी व्रत का महत्व
मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु भगवान विष्णु के ऋषिकेश स्वरूप की उपासना करता है और व्रत कथा का श्रवण करता है, उसे मृत्यु के बाद विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। इस व्रत की कथा सुनने मात्र से ही अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य फल मिलता है।
व्रत एवं पूजन विधि-
व्रत वाले दिन प्रातःकाल स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
दीप, धूप, पुष्प, फल आदि से विधिवत पूजा करें।
विष्णु सहस्रनाम और श्रीकृष्ण भजन का पाठ अवश्य करें।
रात्रि में जागरण करें और अगले दिन नियत समय पर व्रत का पारण करें।
अजा एकादशी पर दान का महत्व
हिन्दू धर्म शास्त्रों में दान बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। सनातन संस्कृति को मानने वाले लोग सदियों से ही दान की महत्ता को समझते आ रहे हैं। लोग मन की शांति, मनोकामना पूर्ति, पुण्य की प्राप्ति, ग्रह-दोषों के प्रभाव से मुक्ति और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए दान करते हैं। हिन्दू धर्म में दान का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि कहा जाता है कि दान का लाभ सिर्फ जीते जी नहीं बल्कि मृत्यु के बाद भी मिलता है। लेकिन दान का पुण्य फल आपको तभी प्राप्त होता है, जब दान सही समय, सही तरीके और सच्चे मन के साथ पात्र व्यक्ति को दिया गया हो।


















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