नियम विरुद्ध मिला सहायक शिक्षिका को खोखसा आश्रम का प्रभार
बसना विकासखंड के अंतर्गत आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित प्राथमिक आदिवासी कन्या आश्रम खोखसा गत कुछ दिनों से विवादों के घेरे में बना हुआ है। जैसे मानो शिक्षालय न होकर रंगमंच का कोई अखाड़ा हो । कुछ दिनों से आश्रम की प्रभारी अधीक्षिका श्रीमती गीता पटेल पर छात्राओं के साथ अभद्रता एवं अश्लील व्यवहार करने संबंधी शिकायत चर्चा का विषय बना हुआ है । शिकायत पर कार्यवाही करने के नाम पर आदिवासी विकास विभाग ने प्राथमिक विद्यालय पठियापाली की सहायक शिक्षिका श्रीमती कंचन कुमर्रा को आनन फानन में आश्रम का प्रभार सौंप दिया। जबकि शासन का स्पष्ट आदेश है कि शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य में ड्यूटी नहीं लगाई जाए तथा समस्त विभागों में किसी भी प्रकार के संलग्नीकरण पर रोक लगाया जाए। यदि किसी कारण से संलग्नीकरण करना अति आवश्यक हो जाए तब इसका औचित्य पूर्ण प्रस्ताव शासन को भेजा जाए । परन्तु यहां प्रस्ताव भेजना तो दूर, शिक्षा विभाग के प्रमुख अधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी से फोन कॉल से अनापत्ति प्रमाण पत्र के बारे में पूछने पर कहा गया कि यह आदेश मेरे द्वारा नहीं सहायक आयुक्त आदिवासी विकास शाखा महासमुंद द्वारा किया गया है उनसे पूछिए ।
सहायक आयुक्त आदिवासी विकास शाखा इस मामले पर पूछताछ करने पर कहा गया नियम की कॉपी भेजिए
देखना दिलचस्प होगा कि आगे क्या होगा शासन का आदेश है कि सभी प्रकार के संलग्नीकरण समाप्त किए जाएंगे ।शासन की स्पष्ट मंशा है कि स्कूलों के शिक्षा के स्तर में सुधार लाया जाए ।तब ऐसे में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा शिक्षकों को अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया जाता है या नहीं।*आदिवासी विकास विभाग के नियुक्ति आदेश में भी गड़बड़ी*
कार्यालय कलेक्टर आदिवासी विकास विभाग के आदेश में भी गड़बड़ी देखने को मिली जिसमें श्रीमती कंचन कुमर्रा को आदिवासी कन्या छात्रावास, भूकेल की अधीक्षिका बताया गया है। जबकि हमारी पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए कि 16 मई 2025 से कन्या छात्रावास भूकेल की वर्तमान अधीक्षिका कुमारी तुनप्रिया ध्रुव जी हैं। इसमें विभाग का यह आदेश भी सवालों के घेरे में आता है कि आखिर श्रीमती कंचन कुमर्रा जी के मूल पद सहायक शिक्षिका प्राथमिक विद्यालय पठियापाली को क्यों आदेश में छुपाया गया एवं उन्हें भूकेल की अधीक्षिका क्यों बताया गया। जिनके पास वर्तमान में किसी छात्रावास का प्रभार नहीं उनके लिए कन्या आश्रम खोखसा अतिरिक्त प्रभार पर कैसे?
आश्रम काफी महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील संस्था है, साथ ही विद्यालय भी बच्चों के भविष्य की राह गढ़ता है, ऐसे में एक ही समय पर एक व्यक्ति दो स्थानों पर कैसे अपनी जिम्मेदारी निभा सकता है, जब स्कूल चालू रहेगी तब आश्रम किसके भरोसे रहेगा? स्कूल समय में अगर आश्रम में कोई अनहोनी होती है तो इसकी जवाबदारी किसकी होगी?खोखसा आश्रम और प्राथमिक विद्यालय पठियापाली दोनों काफी दूरी पर हैं । इतनी दूर के विद्यालय की शिक्षिका को ही क्यों चुना गया। क्या खोखसा आश्रम के निकट कोई और विद्यालय नहीं है जहां के शिक्षिका को आश्रम का प्रभार दिया जा सके?।जानना दिलचस्प होगा कि क्या इसके तार खोखसा के श्रीमती गीता पटेल वाले मामले से जुड़े हैं या विभाग किसी बड़ी गड़बड़ी पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहा है।
क्या कहते हैं नियम?
1. छत्तीसगढ़ शासन, मंत्रालय, स्कूल शिक्षा विभाग, के आदेश दिनांक 02 सितंबर 2025 के अनुसार युक्तियुक्तिकरण के पश्चात शिक्षकों के किसी भी प्रकार के गैर शैक्षणिक कार्य एवं संलग्नीकरण पर शासन द्वारा रोक लगाई गई है।
2.छत्तीसगढ़ शासन, मंत्रालय, आदिम जाति कल्याण विभाग के आदेश के अनुसार केवल उन्हीं शिक्षकों को आश्रम/छात्रावास का प्रभार दिया जा सकता है, जहां के बच्चे उसी संबंधित विद्यालय में अध्ययनरत हैं, तथा शिक्षकों को विद्यालय में अध्यापन कार्य भी करना है।
3. सभी प्रकार के अटैचमेंट समाप्त करने संबंधी नियम नियम 05जून 2025 को प्रकाशित शासन के स्थानांतरण नीति में भी देखने को मिला है।
इस प्रकार शासन की मंशा स्पष्ट है किसी भी प्रकार के अटैचमेंट राज को समाप्त करने एवं स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने शासन प्रतिबद्ध है।


















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