श्रद्धा और आस्था का प्रतीक बना मां पितावली मंदिर, बरगांव में शारदीय नवरात्रि महापर्व का भव्य आयोजन
कुंजराम यादव बसना रिपोर्टर
महासमुंद/बसना:
ग्राम बरगांव इन दिनों श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बना हुआ है, जहां परंपरागत रूप से हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी शारदीय नवरात्रि पर्व को बड़े धूमधाम, उत्साह और धार्मिक भावना के साथ मनाया गया। ग्राम के मां पितावली मंदिर में आयोजित यह आयोजन क्षेत्रभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बन गया है।भक्ति और वैदिक परंपरा का अनूठा संगम पितावली मंदिर समिति के संयोजन में नवरात्रि के नौ दिनों तक विविध धार्मिक अनुष्ठानों, पूजन, और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। पूजन की संपूर्ण प्रक्रिया वैदिक मंत्रोच्चारण और पारंपरिक विधियों से गजराज भोई एवं डोलामणि भोई द्वारा संपन्न कराई गई। हर दिन माता रानी के समक्ष आरती, भजन-कीर्तन और विशेष पूजन अनुष्ठान आयोजित हुए, जिसमें सैकड़ों की संख्या में ग्रामवासी एवं आस-पास के श्रद्धालु शामिल हुए।मुख्य जजमान संदीप प्रधान ने अपने परिवारजनों एवं सहयोगियों के साथ माता रानी को श्रद्धा भाव से छप्पन भोग अर्पित किया। यह भोग श्रद्धा, भक्ति और पारिवारिक समर्पण का प्रतीक बना। उनके साथ गांव के अन्य प्रमुख श्रद्धालु – मंगलदास, कार्तिक राम, सुदाम साहू, पद्मलोचन, आदित्य, जीत, प्रताप, मनीष, भूपेंद्र, दीपक, लिकेश, निर्मल, नितेश, फिरोज, मनोहर, राजेश, प्रकाश, युधिष्ठिर, योगेश, श्याम सहित अनेक भक्तों ने 21 प्रकार के विशेष भोग माता को अर्पित किए।भक्ति-भाव से किए गए इन अनुष्ठानों से पूरे गांव का वातावरण आस्था, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया।कन्या भोज का आयोजन – नारी पूजन की परंपरा का सम्मान बुधवार को नवरात्रि के उपलक्ष्य में नौ कन्याओं का पूजन व भोज श्रद्धापूर्वक आयोजित किया गया। ग्रामीणों की भारी भागीदारी के साथ कन्या पूजन का आयोजन नारी शक्ति के सम्मान और धार्मिक परंपराओं के निर्वहन का प्रतीक बना। ग्रामीणों द्वारा कन्याओं को भोज कराना एक पावन कृत्य माना जाता है और इस दिन का विशेष महत्व होता है। ग्राम बरगाव सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक उपवास रखकर माता की आराधना कर रहे हैं। यह भक्तों की गहरी आस्था, समर्पण और आत्मिक जुड़ाव का जीवंत उदाहरण है। इन व्रतधारी भक्तों ने न केवल उपवास किया, बल्कि रोजाना पूजा, जप, कीर्तन में भी सक्रिय भागीदारी निभाई।
सांस्कृतिक एकता और ग्राम एकजुटता का प्रतीत बरगांव में वर्षों से आयोजित हो रहा यह आयोजन न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि यह गांव की सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को भी मजबूती देता है। नवरात्रि के इन दिनों में गांव की सहभागिता, सेवा भावना और सहयोगी मानसिकता पूरे आयोजन को सफल बनाती है।
ग्रामवासी न केवल पूजा-पाठ में सक्रिय रहते हैं, बल्कि व्यवस्था, प्रसाद वितरण, भंडारा, साफ-सफाई, मंच सजावट और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं।
मां पितावली मंदिर में आयोजित शारदीय नवरात्रि का यह भव्य आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को बल देता है, बल्कि यह सामाजिक समरसता, ग्राम एकता और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का भी अनुपम उदाहरण है। ऐसी परंपराएं ही हमारी विरासत को जीवंत बनाए रखती हैं और आने वाली पीढ़ियों को धर्म, संस्कृति और मूल्यों से जोड़ती हैं।


















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