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दाहोद गुजरात ।
22दिसबर को होने वाले चुनाव में सचिन मिश्रा क्रमांक न: 7️⃣जो कि हर रेलवे कर्मचारियों के सच्चे जननेता
सचिन मिश्रा जी का नाम आज रेलवे कर्मचारियों के बीच संघर्ष, सेवा और समर्पण का पर्याय बन चुका है। यह जनसेवा की परंपरा उन्हें विरासत में मिली है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि
सचिन मिश्रा जी के पिता स्वर्गीय/ राजेंद्र मिश्रा जी पश्चिम रेलवे मजदूर संघ के कर्मठ, निष्ठावान एवं संघर्षशील कर्मचारी रहे हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में मजदूर संघ को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए अनेक उपलब्धियाँ हासिल कीं। उनके इसी संघर्षशील व्यक्तित्व से प्रेरणा लेकर सचिन मिश्रा जी ने भी जनसेवा का मार्ग चुना।
रेलवे सेवा की शुरुआत
सचिन मिश्रा जी वर्ष 1998 में रेलवे में TNC (गाड़ी बाबू) के पद पर रतलाम रेलवे स्टेशन पर भर्ती हुए। कार्यभार संभालते ही उन्होंने महसूस किया कि कर्मचारियों को उनका वाजिब हक नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने बिना किसी भय के कर्मचारियों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई। उनकी ईमानदार और संघर्षशील कार्यशैली से कुछ विरोधी एवं अनैतिक तत्वों को असहजता हुई, जिसके चलते उनका तबादला करवा दिया गया।
मजदूर संघ का भरोसा
सचिन मिश्रा जी की कार्यक्षमता और निष्ठा को देखते हुए पश्चिम रेलवे मजदूर संघ के तत्कालीन महामंत्री श्री दादा माहुरकर साहब ने उन्हें पुनः डेपुटेशन पर रतलाम भेजते हुए स्पष्ट निर्देश दिए, कि वे पूरी निष्ठा से कर्मचारी हित में कार्य करें।
दादा माहुरकर साहब के आदर्शों और चरणबिंदुओं पर चलते हुए सचिन मिश्रा जी ने अगले तीन वर्षों तक रतलाम में कर्मचारियों के हित में उत्कृष्ट कार्य किए। इसी उत्कृष्ट कार्यशैली के कारण उन्हें संघ द्वारा डिवीजन युवा बॉडी का सेक्रेटरी नियुक्त किया गया। जो जेसी बैंक चुनाव क्रमांक 7️⃣ आज उनका चिन्ह है
दाहोद वर्कशॉप में नई पहचान
इसके पश्चात उनका तबादला दाहोद वर्कशॉप में AYM के पद पर हुआ। यहाँ भी उन्होंने कर्मचारियों के हित में उल्लेखनीय कार्य किए और कई पुरस्कार (अवार्ड) प्राप्त किए।
उनकी सेवा भावना और संघर्षशील नेतृत्व ने उन्हें इस क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाई। वे विशेष रूप से ट्रैकमैन कैडर के मसीहा के रूप में उभरकर सामने आए और कर्मचारियों के बीच अपार लोकप्रियता हासिल की।
कोरोना काल में मानवता की मिसाल
कोरोना काल के कठिन समय में सचिन मिश्रा जी ने मानवता की एक अनुपम मिसाल पेश की।
अस्पतालों में भर्ती मरीजों को दवाइयाँ
ऑक्सीजन, ब्लड और अन्य जीवनदायिनी सुविधाएँ
कोरोना काल मे श्मशान घाट पर भी रेलवे कर्मचारियों के परिजनों के साथ खड़े रहे और जो मदद मुमकिन हो सकी, वह की।
उच्च स्तर पर संवाद कर जरूरतमंदों तक संसाधन पहुँचाना
इन प्रयासों से उन्होंने अनेक लोगों की जान बचाई और सच्चे अर्थों में जनसेवक की भूमिका निभाई।
संवेदनशील नेतृत्व के उदाहरण
ट्रैकमैन कर्मचारियों के रनओवर जैसी दुखद घटनाओं में उन्होंने पीड़ित परिवारों के साथ खड़े रहकर मानवीय संवेदना का परिचय दिया।
यहाँ तक कि बिहार राज्य तक पार्थिव शरीर भिजवाने जैसी जिम्मेदारियाँ भी उन्होंने स्वयं निभाईं। ऐसे अनेकों उदाहरण आज भी कर्मचारियों की जुबान पर हैं।
J.C. बैंक डायरेक्टर पद के प्रत्याशी के क्रमांक 7️⃣ पर मोहर लगा कर दाहोद से भरी मतो से विजयी बनाये
लगातार उत्कृष्ट कार्य, निस्वार्थ सेवा और कर्मचारियों में लोकप्रियता को देखते हुए
वर्तमान झोनल महामंत्री खबर साहब
झोनल अध्यक्ष श्री शरीफ पठान साहब
भूतपूर्व मंडल मंत्री श्री बी.के. गर्ग साहब
वर्तमान मंडल मंत्री अभिलाष नागर
मंडल अध्यक्ष श्री प्रताप गिरि
ने सर्वसम्मति से इस जनप्रिय चेहरे को J.C. बैंक के डायरेक्टर पद के लिए प्रत्याशी घोषित किया।
आज श्री सचिन मिश्रा जी के समर्थक और चाहने वाले पूरे डिवीजन के कोने-कोने में फैले हुए हैं।
निष्कर्ष
सचिन मिश्रा जी केवल एक कर्मचारी नेता नहीं, बल्कि रेलवे कर्मचारियों की आवाज़, संघर्ष का प्रतीक और सेवा का जीवंत उदाहरण हैं। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है।
दाहोद गुजरात से पूनम प्रदीप प्रजापति कि रिपोर्ट


















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