मड़ाई मेला में मनीष चेलक का सांस्कृतिक संरक्षण का संदेश*
बिलाईगढ़। ग्राम दोमुहानी में आयोजित चार दिवसीय पारंपरिक मड़ाई मेला के तीसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में मनीष चेलक शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में मड़ाई मेले को छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-संस्कृति और परंपराओं का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ी संस्कृति को सहेजना और आगे बढ़ाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
मनीष चेलक ने विशेष रूप से युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को गर्व के साथ अपनाएं और सामाजिक एकता, भाईचारे एवं सौहार्द को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि मड़ाई जैसे पारंपरिक आयोजन हमारी लोक-परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के साथ-साथ समाज में आपसी मेल-जोल और समरसता को भी बढ़ावा देते हैं।
कार्यक्रम में सतनामी समाज बिलाईगढ़ के ब्लॉक अध्यक्ष सालिक राम घृतलहरे, बिलाईगढ़ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी डॉ. प्रकाश कुर्रे (एमबीबीएस), भीम रेजिमेंट छत्तीसगढ़ जिला सारंगढ़–बिलाईगढ़ के अध्यक्ष बिरेंद्र कमल, आयोजन समिति के सदस्य शिक्षक महासिंग कुर्रे, कपिल कटकर, शैलैन्द्र टण्टन, बाबूलाल बंजारे सहित मेला समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
मड़ाई मेला में हजारों की संख्या में ग्रामवासी एवं आसपास के क्षेत्रों से आए दर्शकों ने भाग लिया। इस दौरान पारंपरिक लोक नृत्य, सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा ग्रामीण हस्तशिल्प की आकर्षक प्रदर्शनी ने दर्शकों का मन मोह लिया।
अपने संबोधन में मनीष चेलक ने सभी ग्रामवासियों से ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय सहभागिता निभाने का आग्रह किया, ताकि छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति और परंपराएं आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सकें। मड़ाई मेला का समापन उत्साह, सांस्कृतिक उल्लास और सामाजिक एकता के संदेश के साथ हुआ, जिससे ग्रामीण जीवन और छत्तीसगढ़ी परंपराओं के प्रति जागरूकता और गर्व की भावना और अधिक मजबूत हुई।



















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