गांव में तालिबानी फरमान! किओस्क संचालक का सामाजिक बहिष्कार, अवैध जुर्माना वसूली का आरोप
बिलाईगढ़।
थाना क्षेत्र बिलाईगढ़ अंतर्गत ग्राम कैथा में कुछ ग्रामीणों द्वारा कानून को ताक पर रखकर एक व्यक्ति के विरुद्ध सामाजिक बहिष्कार, लेन-देन पर प्रतिबंध और अवैध अर्थदंड वसूली का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित किओस्क बैंक संचालक दशरथ साहू ने थाना प्रभारी बिलाईगढ़ को आवेदन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच व दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
आवेदन में दशरथ साहू ने आरोप लगाया है कि चुनावी रंजिश एवं पुराने लेन-देन विवाद के चलते गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों ने बैठक आयोजित कर उनके खिलाफ अवैध निर्णय लिया। इस बैठक में अरुण साहू, वर्तमान ग्राम अध्यक्ष ईश्वर साहू पंच श्रीराम साहू, लोकेश साहू सहित कुछ पंचगण व अन्य लोग शामिल थे। बैठक में यह फरमान जारी किया गया कि कोई भी ग्रामीण उनसे खान-पान, बातचीत अथवा उनके किओस्क बैंक में लेन-देन नहीं करेगा।
इतना ही नहीं, यह भी घोषणा की गई कि जो भी व्यक्ति उनके किओस्क में लेन-देन करेगा, उससे ₹5000 का अर्थदंड वसूला जाएगा। इस भय के कारण महिलाएं, बुजुर्ग सहित ग्रामीणों ने किओस्क आना बंद कर दिया है, जिससे पीड़ित की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
दशरथ साहू ने यह भी बताया कि गांव के पूर्व जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ ग्रामीणों—पूर्व सरपंच दीनदयाल साहू, पूर्व ग्राम अध्यक्ष चंदन साहू, पूर्व ग्राम उपाध्यक्ष खगेश साहू, पूर्व पंच दुर्गेश साहू, विश्वनाथ साहू, परदेशी साहू, कौशल साहू एवं भुवन लाल साहू—को यह जानकारी है कि वे निर्दोष हैं। इसके बावजूद रंजिश के चलते किसी की बात नहीं सुनी गई और दबावपूर्वक ग्रामीणों से राशि वसूली गई।
आरोप है कि विश्वनाथ साहू से ₹1,85,000, कौशल साहू से ₹1,75,000, चंदन साहू से ₹16,000 तथा मुकुंद साहू से ₹3,000 की वसूली की गई। यह पूरी प्रक्रिया भय और दबाव के माहौल में की गई, जिससे गांव की सामाजिक शांति और कानून व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।
पीड़ित ने आवेदन में आशंका जताई है कि यदि इस प्रकार के “तालिबानी फरमान” जारी रहे तो आम ग्रामीणों का जीवन कठिन हो जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि उनके या उनके परिवार के साथ कोई अनहोनी होती है, तो इसके लिए संबंधित लोग जिम्मेदार होंगे।
पीड़ित ने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की कानूनी जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने तथा ग्रामीणों को अवैध दबाव और भय से मुक्त कराने की मांग की है।
अब देखना होगा कि पुलिस इस गंभीर सामाजिक और कानूनी मामले में क्या कदम उठाती है।


















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