भूमिया राजा गेंदसिंह का मुक्ति संग्राम में पहला बलिदान
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय पनिका समाज विकास सेवा परिषद नई दिल्ली के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री संुदर दास मानिकपुरी, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में राष्ट्रीय हल्बा आदिवासी समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री शिव कुमार पात्र (कोण्डागांव), श्री घनश्याम सिंह ठाकुर (अन्तर्राष्ट्रीय कलाकार करमा सम्राट बेमेतरा), डाॅ.भरत दास मानिकपुरी (अ.भा.कबीर पंथ धर्म प्रचारक दुर्ग), श्री महेन्द्र सिंह चैहान (प्रसिद्ध पंडवानी गायक साजा) उपस्थित थे। अकादमी के महासंरक्षक श्रीमती सुशीला देवी वाल्मीकि की अध्यक्षता में प्रांताध्यक्ष प्रो.जी.आर.बंजारे ‘‘ज्वाला’’ ने कार्यक्रम का सफलतापूर्वक संचालन किया।
इस अवसर पर लोक गायिका श्रीमती ईश्वरी मानिकपुरी दुर्ग ने छत्तीसगढ़ राज गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद कु.संध्या नवरंग सक्ती ने मंगल पंथी गीत, श्रीमती कुमारी कृष्णा मिरी भिलाई ने जय भीम गीत, श्री गौकरण मानिकपुरी व साथियों (गरियाबंद) ने माटी वंदना गीत, श्री अर्जुन सिंग सेन (बलौदा बाजार) ने पंडवानी गायन तथा लेाक कवि श्री चूड़ामणि पात्र (कांकेर) ने काव्य पाठ व श्री शिव कुमार पात्र (फरसगांव) ने हल्बी गीत प्रस्तुत किया।
शैक्षणिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक व सामाजिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदेश के 78 विशिष्ट प्रतिभाओं का अवार्ड -2026 राज्य अलंकरण से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में प्रेम सायमन, प्रो.के.मुरारीदास, रवि खरे, डाॅ. भागेश्वर पात्र, डाॅ.रोहनलाल भारव्दाज, लोकनाथ महंत, माखनदास महंत, नीलाजंना साहू, कमलेश कुमार साहू, राजकुमार साहू, प्रमिला साहू, रामगोपाल देशमुख, उभेराम साहू, रविदास मानिकपुरी, डाकवर ठाकुर, चेतनदास मानिकपुरी, हेमंत चन्द्राकर, रामदास मानिकपुरी, तोरण लाल चन्द्राकर, दानीनाथ जोगी, व्दारिका राम साहू, आत्माराम पटेल, भगवती मानिकपुरी, ललित कुमार महन्ते, मदन लहरे, श्रीमती रानी टंडन, सुनील बंजारे, कल्याण साहू , अश्वनी कश्यप, महंत गिरधारी दास, रिटायर्ड कैप्टन श्री लालजी श्रीवास्तव, नथेल दास मानिकपुरी, मोहम्मद मुश्ताक आदि नागरिकों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
कार्यक्रम में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बहादूर शाह जफर, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, वीर नारायण सिंह, गुण्डाधूर, सरदार भगत सिंह, मीन्धू कुम्हार, हेमू कालानी, आदि अमर सेनानियों के देश भक्ति व बलिदान को सगर्व याद करते हुए तथा सामाजिक क्रांति के अग्रदूत संत माता कर्मा, सदगुरू कबीर साहेब, सदगुरू घासीदास साहेब, स्वामी विवेकानंद, शिक्षा क्रांति के अग्रदूत महात्मा ज्योतिबा फुले, श्रीमती सावित्री बाई फुले, संविधान निर्माता बाबा साहब डाॅ.अम्बेडकर व छत्तीसगढ़ी लोक कला संस्कृति के पितामह दाऊ रामचन्द्र देशमुख के सपनों के अनुरूप शोषण मुक्त, समतामूलक समाज व प्रबुद्ध भारत बनाने का संकल्प लिया गया।


















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