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Wednesday, January 14, 2026

परिक्रमा पथ कही राजनीतिक का भेट न चढ़ जाए,पहले से बने अलाईमेट के आधार पर बनने से ग्रामीण क्षेत्र के बेरोजगारों को मिलेगा रोजगार ट्रस्ट समितियों से जुड़े लोगों ने पहले से बने प्रपोजल के अनुसार होना चाहिए कार्य

 परिक्रमा पथ कही राजनीतिक का भेट न चढ़ जाए,पहले से बने अलाईमेट के आधार पर बनने से ग्रामीण क्षेत्र के बेरोजगारों को मिलेगा रोजगार



ट्रस्ट समितियों से जुड़े लोगों ने  पहले से बने प्रपोजल के अनुसार होना चाहिए कार्य


डोंगरगढ़ राजनांदगांव। धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण नगरी डोंगरगढ़ के लिए प्रस्तावित परिक्रमा पथ फोरलेन मार्ग अब एक महत्वाकांक्षी योजना से सिमटकर “स्वप्न परियोजना” बनती नजर आ रही है। माता बमलेश्वरी देवी धाम सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ने के उद्देश्य से लाई गई यह योजना कागजों और डिजाइनों तक सीमित रह गई है, जिससे लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं। वहीं दूसरी ओर pwd के अधिकारियों का कहना है सरकार ने जनता के हितों को देखते हुए यह योजना तैयार किया है और कार्य वैसे ही होगा जैसे आम लोगों ने चाह है 


ज्ञात हो कि वर्ष 2023 में डोंगरगढ़ नगर के चारों ओर भ्रमण हेतु एक समर्पित परिक्रमा पथ फोरलेन मार्ग का प्रस्ताव सामने आया था। इस मार्ग के माध्यम से माता बम्लेश्वरी देवी मंदिर, के चारों ओर परिक्रमा करते हुए यह रोड का निर्माण किया जाना है इसमें पश्चिम भाग से शिव धाम जटाशंकर पहाड़,एडवेंचर जोन,जैन तीर्थ, गुरु घासीदास बाबा रावटी धाम पहाड़ी, प्रज्ञा गिरी तीर्थ मां बम्लेश्वरी पार्किंग, रेलवे स्टेशन, नीचे मां बम्लेश्वरी मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को सुगम आवागमन सुविधा उपलब्ध कराने की परिकल्पना की गई थी। प्रशासन द्वारा एलाइनमेंट तैयार कर प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई थी लगातार मैपिंग, डिजाइनिंग एवं तकनीकी प्रक्रियाएं किए जाने के दावे भी सामने आए। सोशल मीडिया पर इसके डिजाइन वायरल हुए और लोगों में इस परियोजना को लेकर खासा उत्साह भी देखने को मिला। लोगों का कहना है कि सरकार ने सभी ट्रस्ट के सदस्यों मिलकर पर्यटकों सुविधा जनक जो प्रपोजल बनाया गया उसपर ही काम होना चाहिए क्योंकि उस रूट से शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा


परंतु समय बीतने के साथ यह उत्साह निराशा में बदल गया। परियोजना को वर्ष 2024-25 के प्रथम अनुपूरक बजट में शामिल किया गया, जिसमें लगभग 8 किलोमीटर लंबाई के फोरलेन मार्ग के लिए 55 करोड़ 45 लाख रुपये की स्वीकृति दर्शाई गई। पुल-पुलिया, डिजाइन ड्रॉइंग एवं संपूर्ण पथ मैप तैयार होने की जानकारी भी दी गई, लेकिन जमीनी स्तर पर आज तक कार्य प्रारंभ नहीं हो सका।


सबसे बड़ी बाधा भूमि अधिग्रहण को बताया जा रहा है। सड़क निर्माण से जुड़े चार गांवों की लगभग तीन हेक्टेयर भूमि इस परियोजना से प्रभावित होनी है, जिसका अधिग्रहण अब तक लंबित है। इसके अलावा, परियोजना को लेकर बार-बार पुनर्विचार की सुगबुगाहट ने भी इसकी गति को पूरी तरह थाम दिया है।


स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इतनी महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन परियोजना को लेकर शासन-प्रशासन गंभीर होता, तो अब तक कार्य प्रारंभ हो चुका होता। करोड़ों की स्वीकृति और तैयार डिजाइनों के बावजूद जमीन पर सन्नाटा लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।


अब देखना यह होगा कि शासन इस “स्वप्न परियोजना" को वास्तव में धरातल पर उतारने के लिए ठोस कदम उठाता है या परिक्रमा पथ फोरलेन मार्ग केवल फाइलों और घोषणाओं तक ही सीमित रह जाएगा।

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