गणतंत्र दिवस की गरिमा से खिलवाड़ बिलाईगढ़ नगर पंचायत में बिना आमंत्रण, बिना अधिकारियों के हुआ ध्वजारोहण — जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश
बिलाईगढ़।
देशभर में 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पूरे हर्षोल्लास, सम्मान और गरिमा के साथ मनाया गया, लेकिन नगर पंचायत बिलाईगढ़ में इस राष्ट्रीय पर्व की मर्यादा को ठेस पहुँचाने वाला गंभीर मामला सामने आया है।
वर्षों से चली आ रही परंपराओं को दरकिनार करते हुए इस बार न तो नगर के गणमान्य नागरिकों, प्रबुद्धजनों एवं जनप्रतिनिधियों को विधिवत आमंत्रण पत्र जारी किए गए और न ही प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित तैयारियाँ दिखाई दीं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर पंचायत बिलाईगढ़ के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) सुशील चौधरी द्वारा गणतंत्र दिवस समारोह हेतु न तो कोई औपचारिक आमंत्रण पत्र छपवाया गया और न ही उसका वितरण कराया गया। केवल एक साधारण कार्यालयीन आदेश की प्रति जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध कराई गई, जिसे आमंत्रण पत्र का विकल्प नहीं माना जा सकता। परिणामस्वरूप अनेक जनप्रतिनिधि एवं नगर के सम्मानित नागरिक कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके, जिससे समारोह की गरिमा प्रभावित हुई।
राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर नगर पंचायत कार्यालय में अधिकांश नियमित अधिकारी-कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। कार्यक्रम स्थल पर केवल कुछ प्लेसमेंट कर्मचारी ही मौजूद थे। आश्चर्यजनक रूप से सीएमओ स्वयं भी ध्वजारोहण कार्यक्रम में उपस्थित नहीं रहे। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 15 अगस्त 2025 के स्वतंत्रता दिवस समारोह में भी सीएमओ की अनुपस्थिति रही थी, जिससे लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय पर्व में उनकी गैरमौजूदगी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस से संबंधित कार्यालयीन आदेश क्रमांक न.पं./2026/937, दिनांक 26.01.2026 को स्वयं गणतंत्र दिवस के दिन ही जारी किया गया। आदेश में उप अभियंता रोहित रंजन सिंह को कार्यक्रम का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था, जो स्थल पर उपस्थित रहे। किंतु निंदा की बात यह रही कि नगर अध्यक्ष को स्वयं राष्ट्रगान, नारे एवं जयघोष कर कार्यक्रम संपन्न कराना पड़ा, जो नगर पंचायत प्रशासन की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
कार्यालयीन आदेश में प्लेसमेंट कर्मचारियों को लाइट व्यवस्था, मंच सज्जा, ध्वज व्यवस्था, स्वागत-सत्कार, चाय-नाश्ता एवं स्वच्छता जैसी जिम्मेदारियाँ सौंपी गई थीं, लेकिन आदेश जारी करने में हुई देरी और अव्यवस्थित प्रबंधन के चलते ये सभी व्यवस्थाएँ मात्र औपचारिकता बनकर रह गईं। उदाहरण स्वरूप, रात्रिकालीन प्रकाश व्यवस्था के लिए 26 जनवरी की रात का उल्लेख किया गया, जबकि परंपरानुसार यह कार्य 24 जनवरी की शाम तक पूर्ण किया जाना चाहिए था।
स्थानीय नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह लापरवाही मात्र प्रशासनिक उदासीनता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पर्व के प्रति असंवेदनशीलता को भी दर्शाती है। सीएमओ पर गुटबाजी कराने, कर्मचारियों व जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा करने तथा मनमानी रवैया अपनाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। स्थिति यह रही कि कुछ पार्षद एवं पार्षद प्रतिनिधियों ने अटल परिसर में तिरंगा फहराया, जबकि नगर अध्यक्ष सहित निर्दलीय पार्षदों ने नगर पंचायत कार्यालय की गरिमा बनाए रखते हुए वहीं ध्वजारोहण किया।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर नगर में भारी आक्रोश व्याप्त है। नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों ने उच्चाधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में राष्ट्रीय पर्वों की गरिमा से किसी भी प्रकार का समझौता न हो।




















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