पिपरा में पांच दिवसीय सत्संग एवं चौंका आरती का आयोजन
नवागढ़ जांजगीर छत्तीसगढ़ :- पिपरा में पांच दिवसीय सत्संग में पधारे संत कोमल साहेब ने सद्गुरु कबीर साहेब की गाथा को अपने उद्बोधन में कहा यह नश्वर संसार में सत्य के मार्ग में चलकर मोह माया के साथ रहकर दसों इन्द्रियों पर संयम रख कर जीवन जीने बातें कही ,सत्गुरु कबीर भी अपने बीज की साखी में कहे
"माया मेरी न मन मरा , मर मर जात शरीर ।आशा तृष्णा न मरै , कह गये दास कबीर ।।
उद्बोधन के क्रम में परम श्रधेय संत रामलाल साहेब जी गुरु की महत्ता को बताते हुए कहे सात दीप नौ खंड में,गुरु से बड़ा न कोई। करता करै न कर सकै,गुरु करै से होय। गुरु ही बताए हुए सत्मार्ग में चलकर भवसागर रूपी नईया को पार कर सकते,दुनिया वाले से नही, दुनियां (संसार) को बनाने वाले ईश्वर पर विश्वास करना चाहिए,परमात्मा को बाहर नहीं अपने आत्मा के अंदर में खोजने को कहा है सद्गुरु की साखी ज्यों तिल माही तेल है, ज्योँ चकमक में आग। तेरा साँई तुझमे है जाग सके तो जाग।। अर्थात इस साखी शब्द से स्पष्ट हो जाता है की परमात्मा और कही नही है बल्कि अपने भीतर है हमें इस संसार से जो कुछ मिला उसे इसी जहां पर छोड़ जाना पड़ेगा तो हमे सब के साथ मैत्री भाव के साथ मर्यादा ,धर्म ,अनुशासित रहकर जीवन व्यतित करने की कला आ जाए वही इंसान महान हैं। माता पिता और गुरुजन ही सबसे पूजनीय है, अंत में मेरा मुझसे कुछ नहीं, जो कुछ है सो तोर।तेरा तुझको सौपता, क्या लागत है मोर ।। कहते हुए सभी को आशीर्वाद दिए इस कार्यक्रम में क्षेत्र से आये सभी संतो का भेंट सम्मान के समिति द्वारा किया गया आसपास से संतजन उपस्थित होकर दर्शन लाभ लिए। समिति के सभी सदस्यों की विशेष सहयोग से बहुत ही सुंदर तरीके से क्रम की संचालन आयोजक समिति के सचिव जागेश्वर दास महन्त ने किया और अध्यक्ष ने सबका तन, मन और धन की अपार सहयोग देकर कार्यक्रम को सफल बनया किरीत वाले राजू साहू DJ वाले के कर्मचारियों ने एक अच्छा,पंडाल साउंड ,और लाइट से सभा स्थल को सुसज्जित किया है कहते हुए सभी का आभार व्यक्त कर आशीर्वाद लेते हुए कार्यक्रम की समापन की घोषणा किया।


















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