300 ट्रकों का ज़हर और प्रशासन मौन
जल स्रोत युक्त खदानों में फ्लाईएश-औद्योगिक कचरा डंपिंग पर सवालों के घेरे में जिला प्रशासन
बिलाईगढ़।
सारंगढ़–बिलाईगढ़ जिले में प्रतिदिन सैकड़ों ट्रकों के माध्यम से फैल रहा औद्योगिक ज़हर अब केवल पर्यावरणीय संकट नहीं, बल्कि प्रशासनिक चूक और निगरानी तंत्र की विफलता का गंभीर उदाहरण बनता जा रहा है।
रायगढ़ जिले के औद्योगिक संयंत्रों से निकलने वाला फ्लाईएश एवं औद्योगिक कचरा खुलेआम जल स्रोत युक्त पत्थर खदानों में डंप किया जा रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक किसी भी जिम्मेदार विभाग ने ठोस कार्रवाई नहीं की है।
300 से अधिक वाहन रोज़ाना—फिर भी प्रशासन अनभिज्ञ?
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रतिदिन 300 से अधिक भारी मालवाहक वाहन रायगढ़ से सारंगढ़, सरसीवां, भटगांव होते हुए बिलाईगढ़ क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं।
ये वाहन पूरे रास्ते सड़कों पर फ्लाईएश गिराते हुए चलते हैं, जिससे सड़कें सफेद परत में तब्दील हो चुकी हैं।
प्रश्न यह है कि—इतनी बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही क्या प्रशासन की निगाहों से बाहर संभव है?
यदि जानकारी है, तो कार्रवाई क्यों नहीं? और यदि जानकारी नहीं, तो यह प्रशासनिक तंत्र की घोर विफलता नहीं तो और क्या है?
जल स्रोतों में ज़हर, भविष्य के लिए संकट
जिन पत्थर खदानों में फ्लाईएश और औद्योगिक डस्ट डंप किया जा रहा है, वहाँ प्राकृतिक जल स्रोत व जल संचयन की स्थिति मौजूद है। यह कृत्य पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 एवं जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974 का सीधा उल्लंघन है।
इसके बावजूद न तो खदानों को सील किया गया, न वाहनों को रोका गया और न ही किसी अधिकारी की जवाबदेही तय हुई।
शिकायत, वीडियो साक्ष्य—फिर भी चुप्पी क्यों?
भीम रेजिमेंट छत्तीसगढ़ के प्रदेश सचिव मनीष चेलक द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), बिलाईगढ़ को लिखित शिकायत एवं वीडियो साक्ष्य उपलब्ध होने की जानकारी दी जा चुकी है। इसके बाद भी अब तक संयुक्त जांच, स्थल निरीक्षण या एफआईआर जैसी कोई कार्रवाई सामने नहीं आई।
यह स्थिति प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
“सफेद ज़हर” से आमजन त्रस्त
फ्लाईएश का महीन पाउडर हवा में घुलकर दोपहिया वाहन चालकों, राहगीरों और स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल रहा है। आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत और त्वचा रोग जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन की चुप्पी धीरे-धीरे जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ में बदल रही है।
गाइडलाइन सिर्फ कागज़ों तक सीमित
फ्लाईएश परिवहन के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार वाहनों को पूरी तरह सील व ढंका जाना अनिवार्य है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके विपरीत है। अधिकतर वाहन नियमों का उल्लंघन करते नजर आ रहे हैं, फिर भी न तो चालानी कार्रवाई हो रही है और न ही परिवहन पर रोक।
सबसे बड़ा सवाल—किसके संरक्षण में हो रहा खेल?
स्थानीय लोगों के बीच अब यह सवाल आम हो चला है कि—
क्या यह अवैध डंपिंग प्रशासनिक संरक्षण में हो रही है?
क्या पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से बड़ा कोई और हित जिम्मेदारों के लिए प्राथमिकता बन गया है?
या फिर कार्रवाई से बचने के लिए जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं?
जनता ने मांगा जवाब
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से स्पष्ट मांग की है कि—
तत्काल संयुक्त जांच दल गठित किया जाए,
दोषी खदान संचालकों, परिवहनकर्ताओं एवं उद्योगों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई हो,
फ्लाईएश डंपिंग पर तत्काल पूर्ण रोक लगाई जाए,
और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
अब सवाल यह नहीं कि प्रदूषण हो रहा है या नहीं,
सवाल यह है कि—प्रशासन कब जागेगा?
























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