पशुपालन मंत्री के दावों को ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य ने दी चुनौती
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
वाराणसी - विगत दिनों उत्तरप्रदेश के पशुपालन मंत्री द्वारा राज्य में गो-वंश को पूर्णतः सुरक्षित बताने और गोकशी की घटनाओं को 'भ्रम' व 'असत्य' करार देने वाले वक्तव्य पर ज्योतिष्पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामीश्री अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती '१००८' ने कड़ा रुख अपनाया है। पूज्य महाराजश्री ने माननीय मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर राजसत्ता के दावों को धरातल पर सिद्ध करने के लिये 'ज्योतिष्पीठ' के प्रतिनिधियों को स्वतंत्र जाँच और 'प्रमाण संकलन' की अनुमति देने की मांग की है। शंकराचार्यजी ने स्पष्ट किया है कि यदि शासन का विश्वास अडिग है , तो पारदर्शिता के लिये वैज्ञानिक परीक्षण से संकोच नहीं होना चाहिये। शंकराचार्यजी ने अपने संदेश में कड़े शब्दों में कहा है कि यदि शासन के दावे सत्य हैं , तो इस अनुमति को प्रदान करने में कुछ क्षण का भी विलंब नहीं होना चाहिये। अनुमति ना देना इस बात का स्वतः प्रमाण होगा कि पशुपालन मंत्री का वक्तव्य केवल सत्य पर पर्दा डालने का एक प्रयास मात्र है। शंकराचार्य जी का मानना है कि गो-वंश की रक्षा केवल कागजी आंकड़ों में नहीं , बल्कि धरातल पर दिखनी चाहिये। यदि शासन सहयोग करता है , तो दूध का दूध और पानी का पानी होने में समय नहीं लगेगा।


















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