उम्मीदों के मुताबिक है केंद्रीय बजट - रवि कान्त
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
नई दिल्ली - बाल संरक्षण के लिये काम कर रहे संगठनों ने 2026 के केंद्रीय बजट का स्वागत किया है। बच्चों की सुरक्षा व संरक्षण के लिये काम कर रहे 250 से भी ज्यादा नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) ने बच्चों के लिये बजटीय आवंटन में निर्णायक और लंबे समय से प्रतीक्षित बढ़ोतरी का हवाला देते हुये इस बजट को “उम्मीदों के मुताबिक” बताया है। भारत में बच्चों के कल्याण के लिये कुल बजटीय आवंटन वित्त वर्ष 2025–26 के 1,16,133 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026–27 में 1,32,297 करोड़ रुपये हो गया है , जो 14 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी है। केंद्रीय बजट 2026 का स्वागत करते हुये जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा कि यह बजट बाल अधिकारों और बच्चों की शिक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का एक स्पष्ट और सशक्त संदेश देता है। एक दशक से अधिक समय में पहली बार कुल संघीय बजट में बच्चों के लिये आवंटन का हिस्सा बढ़ा है। पिछले वर्ष की तुलना में वित्त वर्ष 2026–27 में बच्चों के कल्याण के लिये कुल बजट में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है , जो ना केवल महत्वपूर्ण है बल्कि आवश्यक भी है। कौशल विकास , एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय , जनजातीय कार्य , अल्पसंख्यक कल्याण और जल जीवन मिशन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बढ़े हुये आवंटन के साथ भारत ने ‘विकसित भारत’ और बाल विवाह-मुक्त भारत के लक्ष्य की ओर एक स्पष्ट नीतिगत दिशा अपनाई है। उन्होंने आगे कहा कि बाल विवाह गहरे तक जड़ें जमाये सामाजिक और आर्थिक असमानताओं का कारण भी है और परिणाम भी। इस वर्ष का बजट बालिकाओं की शिक्षा , कौशल विकास व आत्मनिर्भरता में निवेश करके इन चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाता है। बालिकाओं को सशक्त बनाये बिना वर्ष 2030 तक बाल विवाह के खात्मे की प्रतिबद्धता एक मुश्किल लक्ष्य साबित होगा।


















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