पेंशनर कल्याण निधि नियम 2006 में तुरन्त संशोधन कर सहायता राशि में वृद्धि करने की मांग
अन्य राज्यों की तरह कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ पेंशनरों को भी दे-- वीरेन्द्र नामदेव
सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी।
रायपुर-भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र नामदेव ने मध्यप्रदेश शासन पेंशनर कल्याण निधि नियम 1997 में वित्त विभाग छत्तीसगढ़ शासन के संशोधन आदेश दिनांक 24 अगस्त 2006 को निरस्त कर सहायता राशि में तत्काल वृद्धि करने की मांग करते मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से अनुरोध है कि छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों के लिए कैशलेश चिकित्सा सुविधा देने हेतु घोषणा की गई परंतु पेंशनरों के लिए कुछ नहीं कहा गया है जबकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों के साथ साथ पेंशनरों को भी शामिल किया है अन्य राज्यों में कैशलेश चिकित्सा का लाभ पेंशनर्स को दिया जा रहा है। इसलिए भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ ने छत्तीसगढ़ सरकार से पेंशनरों को केसलेश चिकित्सा सुविधा देने की मांग की है।
पेंशनर्स महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रांताध्यक्ष तथा छ ग राज्य संयुक्त पेंशनर्स फेडरेशन के प्रदेश संयोजक वीरेंद्र नामदेव ने बताया है कि मध्यप्रदेश शासन में बनाए गए पेंशनर कल्याण निधि नियम 1997 के आधार पर छत्तीसगढ़ राज्य में पेंशनरों को राज्य बनने के 6 साल बाद तक सहायता दी जाती रही. बाद में अगस्त 2006 में वित्त विभाग ने सहायता राशि में संशोधन किया. जिसमें राज्य बाहर इलाज कराने पर 20 हजार को वृद्धि कर 30 हजार और राज्य के भीतर इलाज के लिए 6 हजार को बढ़ाकर 10 हजार किया गया है.जो उस समय से लेकर अब तक कई साल से जारी है. शासन के इस आदेश की जानकारी के अभाव में प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख पेंशनर्स और परिवार पेंशनरों में से एक हजार पेंशनर भी इसका कोई लाभ नहीं ले रहा है.यह सहायता "ऊँट के मुँह में जीरा" वाली कहावत को चरितार्थ कर रहा है.
पेशनरों के आर्थिक सहायता के लिए जारी इस आदेश से पेंशनर एवं परिवार पेंशनरों के अनभिज्ञ रहने के कारण कोई लाभ नहीं उठा पा रहे हैं इससे सम्बन्धित विभागीय अफसर भी अज्ञानता के कारण पूछताछ करने वाले पेंशनरों को सही जानकारी देने में असमर्थ रहते हैं. अत: इसके बारे में प्रचार प्रसार करने की मांग की गई है।
भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश के पदाधिकारी क्रमशःतथा अन्य पदाधिकारी क्रमशः जे पी मिश्रा, अनिल गोल्हानी, प्रवीण कुमार त्रिवेदी ,बी एस दसमेर, आर जी बोहरे, ओ डी शर्मा , शैलेन्द्र कुमार सिन्हा,एम एन पाठक, आर के टंडन, अनिल पाठक, हरेंद्र चंद्राकर, लोचन पांडेय,आर के साहू ' एन के कनौजे, आर के दीक्षित, आदि ने कल्याण निधि नियम 2006 को निरस्त कर संशोधन की जरूरत पर बल दिया है और केसलेस इलाज सुविधा देने की मांग की है।


















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