मददेड: अंधेरे के साये में 'राम नवमी' मेला, बंद पड़ी स्ट्रीट, सोलर लाइटें दे रही हैं हादसों को दावत
मददेड।
एक तरफ पंचायत राम नवमी के पावन अवसर पर भव्य मेले की तैयारियों के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायत मददेड की हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है।
पिछले कई महीनों से गांव की अधिकांश सोलर और स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं, जिससे पूरा गांव अंधेरे की आगोश में है।
आस्था पर भारी पड़ता पंचायत का 'अंधेरा'
आगामी दिनों में मददेड में राम नवमी का विशाल मेला आयोजित होना है।
इस मेले में दूर-दराज से लाखों की संख्या में श्रद्धालु और व्यापारी पहुंचते हैं।
लाइट बंद होने के कारण ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
लोगों का कहना है कि जब गांव के मुख्य चौराहों और गलियों में ही अंधेरा रहेगा, तो मेले की सुरक्षा और व्यवस्था कैसे सुनिश्चित होगी?
खतरे की घंटी: चोरी और दुर्घटनाओं का डर
अंधेरे का फायदा उठाकर गांव में चोरी और असामाजिक तत्वों की गतिविधियां बढ़ने की आशंका प्रबल हो गई है।
ग्रामीणों ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि:
सड़क दुर्घटनाएं: मुख्य मार्गों पर रोशनी न होने से आए दिन छोटे-मोटे एक्सीडेंट हो रहे हैं।
सुरक्षा में चूक: मेले के दौरान उमड़ने वाली भीड़ में अंधेरे के कारण जेबकतरा और महिलाओं के साथ अभद्रता जैसी घटनाएं घट सकती हैं।
जहरीले जीव-जंतु: गर्मी के मौसम में सांप-बिच्छू का खतरा बढ़ जाता है, लाइट न होने से राहगीरों की जान जोखिम में है।
पंचायत की चुप्पी पर उठते सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि लाइटें खराब होने की सूचना कई बार पंचायत स्तर पर दी गई है, लेकिन जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं
सवाल यह उठता है कि क्या पंचायत किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?
राम नवमी जैसे संवेदनशील और बड़े आयोजन से पहले इन लाइटों को सुधारना प्राथमिकता क्यों नहीं बनी?
"मेला हमारी आस्था का प्रतीक है, लेकिन अंधेरे के कारण हम डरे हुए हैं।
अगर मेले से पहले लाइटें ठीक नहीं हुईं, तो किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत और स्थानीय प्रशासन की होगी।"
मददेड की जनता अब आर-पार के मूड में है। अगर समय रहते स्ट्रीट लाइटें चालू नहीं की गईं, तो ग्रामीण इस समस्या को लेकर उच्च अधिकारियों का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे।*


















No comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box.