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Thursday, March 26, 2026

छत्तीसगढ़ के लाल का कमाल: डॉ. महेश कुमार श्याम को पीएचडी की उपाधि, जैविक खेती के जरिए बदल रहे किसानों की तकदीर

 छत्तीसगढ़ के लाल का कमाल: डॉ. महेश कुमार श्याम को पीएचडी की उपाधि, जैविक खेती के जरिए बदल रहे किसानों की तकदीर



छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के एक छोटे से गांव दुल्लापुर से निकलकर डॉ. महेश कुमार श्याम ने कृषि और जैविक खेती के क्षेत्र में सफलता का नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने 'जैविक खेती' के क्षेत्र में अपने गहन शोध के लिए पीएचडी (डॉक्टरेट) की मानद उपाधि हासिल की है। उनकी इस उपलब्धि को अनुसूचित जनजाति आयोग, छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष द्वारा 'जनजाति गौरव' के रूप में सम्मानित भी किया गया है।

मिट्टी की सेहत से लेकर समाज के स्वास्थ्य तक का सफर

डॉ. महेश ने अपना शोध हिंदी विद्यापीठ, बनारस (BHU), उत्तर प्रदेश से पूर्ण किया। उनके शोध का मुख्य केंद्र मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, रसायन-मुक्त खेती और पर्यावरण संरक्षण रहा। उन्होंने यह सिद्ध किया है कि जैविक खेती न केवल पर्यावरण को बचाती है, बल्कि यह स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए भी अनिवार्य है।

खेत-खलिहानों तक पहुँचाया विज्ञान (मास्टर ट्रेनर के रूप में पहचान)

डॉ. श्याम केवल कागजी शोध तक सीमित नहीं रहे। एक नेशनल मास्टर ट्रेनर के रूप में उन्होंने गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में 'फील्ड-टू-फील्ड' जाकर हजारों किसानों को प्रशिक्षित किया है।

किसानों को सिखाए जैविक अस्त्र:

उन्होंने पारंपरिक खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए किसानों को निम्न के निर्माण और उपयोग की बारीकियां सिखाईं:

  जैविक खाद: वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत, बीजामृत।

  जैविक कीटनाशक: ब्रह्मास्त्र, अग्नि अस्त्र, नीमास्त्र और दशपर्णी अर्क।

  मित्र कीट: ट्राइकोडर्मा, स्यूडोमोनास और बेसिला का कृषि में महत्व।

> "मेरा लक्ष्य खेती को रसायनों के जहर से मुक्त कर इसे फिर से लाभदायक और सुरक्षित बनाना है। जब तक किसान सशक्त नहीं होगा, तब तक समाज स्वस्थ नहीं होगा।"

> — डॉ. महेश कुमार श्याम

मार्गदर्शन और सम्मान

डॉ. श्याम ने अपना यह शोध डॉ. सुनीता पंद्रो के कुशल मार्गदर्शन में पूरा किया, जिसमें विशेषज्ञ गाइड डॉ. शंभाजी राजाराव बाविस्कर और डॉ. इंद्रजीत तिवारी का विशेष तकनीकी सहयोग रहा। उनकी इस सफलता पर क्षेत्र के किसानों, सामाजिक संगठनों और शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए इसे पूरे प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताया है।

मूलतः लोरमी तहसील के दुल्लापुर निवासी डॉ. श्याम आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं जो कृषि को एक उज्ज्वल करियर के रूप में देखते हैं।

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