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Tuesday, March 24, 2026

शहीद दिवस पर वीरों की याद में मनाया शहीद दिवस जिन्होंने अपने जीवन का हर क्षण मातृभूमि के लिए समर्पित कर दिया और अंत में हंसते-हंसते फांसी के फंदे को गले लगा लिया।

 शहीद दिवस पर  वीरों की याद में मनाया शहीद दिवस  जिन्होंने अपने जीवन का हर क्षण मातृभूमि के लिए समर्पित कर दिया और अंत में हंसते-हंसते फांसी के फंदे को गले लगा लिया।




सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी 

 रायपुर -शहीद दिवस 23 मार्च को पूरे भारतवर्ष में मनाया जाता है, शहीद दिवस के अवसर शहीदों के 

अमर बलिदान की गाथा स्मरण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

  इस अवसर पर  एक गरिमामयी कार्यक्रम कुशालपुर में आयोजित किया गया, श्री उत्तम शर्मा ने कहा 

आज का दिन केवल एक स्मरण नहीं, बल्कि उस अदम्य साहस, त्याग और देशभक्ति का प्रतीक है जिसने भारत को स्वतंत्रता की राह दिखाई

यह दिन हमें उन वीर सपूतों की याद दिलाता है, जिन्होंने अपने जीवन का हर क्षण मातृभूमि को समर्पित कर दिया और अंत में हँसते-हँसते फाँसी के फंदे को गले लगा लिया।


भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव— ये केवल नाम नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं, एक क्रांति हैं, जिससे हम हर भारतीयों को प्रेरणा मिलती है और ये वीर शहीद हमारे  दिल में आज भी जीवित है।

श्री योगेश सेंगर ने कहा कि 

23 मार्च 1931 की वह काली रात, जब अंग्रेजी हुकूमत ने इन तीनों वीरों को फाँसी दी, भारत के इतिहास में एक ऐसा अध्याय बन गई, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

  आज हम उन्हें याद कर प्रेरणा ले रहे हैं।    

श्री दामोदर शर्मा ने कहा कि 

इन वीरों ने हमें सिखाया कि देशप्रेम का अर्थ केवल शब्दों में नहीं, बल्कि अपने कर्मों, अपने त्याग और अपने संकल्प में होता है।

उन्होंने हमें यह भी बताया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी ताकत हमें झुका नहीं सकती।


उनका बलिदान हमें यह याद दिलाता है कि आज जो हम खुली हवा में सांस ले रहे हैं, जो हम अपने विचार खुलकर व्यक्त कर पा रहे हैं, वह सब उनके त्याग का ही परिणाम है।

उनके बिना यह आज़ादी अधूरी होती, उनका संघर्ष ही हमारी पहचान है।



श्री राजेश कुमार ने कहा कि 

शहीद दिवस के अवसर पर, हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने देश के प्रति सच्चे रहेंगे, अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करेंगे और भारत को एक मजबूत, समृद्ध और सम्मानित राष्ट्र बनाने में अपना योगदान देंगे।


यह दिन हमें केवल श्रद्धांजलि देने का नहीं, बल्कि खुद से यह सवाल करने का भी है —

क्या हम उस आज़ादी की कीमत को समझते हैं, जो हमें इतनी कुर्बानियों के बाद मिली है।

 इस अवसर पर उपस्थित रहे अशोक शर्मा,दिलीप यादव,कमलेश तिवारी, श्रीमती कल्पना शर्मा, एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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