दशामाता व्रत आज-मान्यता है कि इस व्रत को रखने से दशा माता के आशीर्वाद से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी।
Dasha Mata Puja -2026- चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि बहुत ही विशेष मानी जाती है। नवरात्रि से पांच दिन पहले दशा माता की पूजा की जाती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने परिवार की सुख समृद्धि के लिए दशा माता का व्रत रखती हैं।
इस साल दशा माता व्रत 13 मार्च को रखा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन महिलाएं डोरे से पीपल के पेड़ की पूजा करती है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से घर की दशा सुधरती है और दरिद्रता दूर होती है।
पंचांग की गणना के अनुसार, 13 मार्च को दशमी तिथि का आरंभ सुबह में 6 बजकर 30 मिनट पर आरंभ होगा और 14 मार्च को सुबह में 8 बजकर 11 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। उदय तिथि के अनुसार, दशा माता का व्रत 13 मार्च को ही करना शास्त्र सम्मत माना गया है, मान्यता है कि जब भी कोई तिथि सूर्योदय के दौरान लगती है। तभी वह मान्य होती है।
दशा माता व्रत में डोरे का महत्व-
डोरा माता के व्रत में महिलाएं एक रेशमी डोरे लेकर उसमें 10 धागों को जोड़कर एक बनाती हैं और उसमें 10 गांठ लगाई जाती हैं। इसके बाद उस डोरे को माता के सामने रखकर उनसे आशीर्वाद लेकर पूजा करने के बाद उसे महिलाएं पहन लेती हैं। माता की पूजा के लिए एक दिन पहले ही उनकी प्रतिमा बनाई जाती है। इसके बाद पूजा करने के बाद उनकी प्रतिमा को विसर्जित कर दिया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता की पूजा के बाद इस डोरे को कम से कम एक साल तक पहनना चाहिए। इसके बाद वैशाख मास में किसी शुभ तिथि पर इस डोरे को खोल दिया जाता है। ऐसी मान्यता है यह धागा आपकी जिंदगी में सुख समृद्धि लेकर आता है। साथ ही रिश्तों में खुशहाली बनी रहती है और घर में धन संपत्ति बनी रहती है।
दशा माता व्रत में अन्न ग्रहण नहीं किया जाता है इसमें मीठा खाया जाता है। एक समय गेहूं का सेवन चाहे तो कर सकते हैं।
इस व्रत की पूजा पीपल के पेड़ के पास की जाती है। सभी महिलाएं एक साथ बैठकर दशा माता व्रत कथा का पाठ करती हैं और माता रानी से सुख समृद्धि की कामना करती है ।



















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