“विकास या विनाश? बिलाईगढ़ बना भ्रष्टाचार का गढ़!”*
“कागजों में चमकता विकास, ज़मीन पर हकीकत गायब — करोड़ों के घोटालों से गूंज रहा बिलाईगढ़”
बिलाईगढ़।
सारंगढ़–बिलाईगढ़ संयुक्त जिला होने के बावजूद जहां सारंगढ़ में विकास की रफ्तार दिखाई देती है, वहीं बिलाईगढ़ में हालात इसके बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिलाईगढ़ अब विकास नहीं बल्कि भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं का केंद्र बन चुका है। कागजों में करोड़ों के विकास कार्य दर्ज हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में उनका अस्तित्व तक दिखाई नहीं देता।
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की लंबी सूची
नगर पंचायत बिलाईगढ़ में पिछले एक वर्ष के दौरान कई योजनाओं में भारी अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
20 लाख की अटल परिसर निर्माण 4 माह बाद उसी निर्माण कार्य में पार्षद निधि राशि का आहरण
पार्षद निधि का दुरुपयोग बिना कार्य कराए राशि का आहरण
पार्षद निधि से नाला सफाई एवं गहरीकरण
पुराने पेवर ब्लॉक और गार्डन निर्माण में पार्षद निधि का आहरण
ठेकेदारों को अग्रिम भुगतान
कमीशनखोरी के चक्कर में बिना टेंडर किए पुराने एजेंसी को दिया जा रहा 3 साल से ठेका
बिना अनुमति शासकीय भूमि पर अवैध शॉपिंग कॉम्प्लेक्स निर्माण
गौरव पथ निर्माण और ट्रांसफार्मर-पोल शिफ्टिंग
अधूरे गौरवपथ सीसी रोड का अग्रिम भुगतान एवं अपूर्ण ट्रांसफार्मर एवं पोल शिफ्टिंग पूर्ण भुगतान
इन सभी कार्यों में “10% काम, 100% भुगतान” जैसी गंभीर गड़बड़ियों के आरोप लगाए जा रहे हैं।
14.71 लाख का फर्जी भुगतान!
सबसे बड़ा मामला 2 मार्च 2026 को सामने आया, जब “रमेश हार्डवेयर” के नाम पर बिना सामग्री खरीदे ही 14 लाख 71 हजार 122 रुपये का भुगतान जल प्रदाय सामग्री के नाम पर कर दिया गया। इस मामले ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है।
स्थानीय एवं जिला प्रशासन भी दबाव में?
चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि स्थानीय प्रशासन के अधिकारी भी खुलकर कार्रवाई करने से बचते नजर आ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक एक अधिकारी ने अनौपचारिक बातचीत में स्वीकार किया कि संबंधित अधिकारी की “ऊंची पहुंच” के कारण कार्रवाई करना मुश्किल है।
शिकायत करने वालों पर ही कार्रवाई?
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर ही पुलिस कार्रवाई की जाती है। इससे आम जनता में भय और आक्रोश दोनों का माहौल बना हुआ है।
पानी के लिए तरसते लोग
एक ओर करोड़ों के भुगतान हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बिलाईगढ़ में लोग पीने के पानी के लिए परेशान हैं। हालात यह हैं कि जल, विद्युत और सफाई विभाग के कर्मचारियों को मूल कार्यों से हटाकर अन्य कार्यों में लगाया जा रहा है, जिससे मूलभूत सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
अधूरा गौरव पथ बना प्रतीक
सालों से अधूरा पड़ा गौरव पथ निर्माण अब प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बन चुका है। इसी रास्ते से अधिकारी और जनप्रतिनिधि गुजरते हैं, लेकिन निर्माण कार्य की सुध लेने वाला कोई नहीं।
मीडिया पर भी दबाव के आरोप
सूत्रों का कहना है कि इस मामले को उजागर करने वाली खबरों को दबाने के लिए कुछ पत्रकारों पर दबाव बनाया गया और प्रलोभन देकर खंडन तक प्रकाशित कराया गया।
बिना बैठक, करोड़ों का खेल!
नगर पंचायत में परिषद और पीआईसी की बैठक लंबे समय से नहीं हुई है, फिर भी करोड़ों के भुगतान और निर्माण कार्यों को मंजूरी दी जा रही है, जो नियमों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सवालों के घेरे में पूरा सिस्टम
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि—
आखिर बिलाईगढ़ के विकास को किसकी नजर लग गई?
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?
क्या पूरे सिस्टम में मिलीभगत है?
जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक बिलाईगढ़ के लोगों को “विकास” नहीं, बल्कि “विनाश” का ही सामना करना पड़ेगा।


















No comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box.