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Monday, April 6, 2026

बम्होडी गौशाला बनी 'मौत का बाड़ा': बदहाली की भेंट चढ़ रही गौमाता, सरपंच मनसुख लाल इरपाची का शर्मनाक बयान— "गलती हो जाती है"

 जिला सिवनी मध्यप्रदेश 

बम्होडी गौशाला बनी 'मौत का बाड़ा': बदहाली की भेंट चढ़ रही गौमाता, सरपंच मनसुख लाल इरपाची का शर्मनाक बयान— "गलती हो जाती है"



 सी एन आई न्यूज सिवनी लखनादौन जनपद पंचायत लखनादौन के आने वाले ग्राम पंचायत ​[बम्होडी] | आस्था और सियासत के केंद्र में रहने वाली गौमाता आज ग्राम पंचायत बम्होडी की गौशाला में अपने अस्तित्व की लड़ाई हार रही हैं। जिस स्थान को गायों के संरक्षण और संवर्धन के लिए बनाया गया था, वह आज उनकी 'कब्रगाह' में तब्दील हो चुका है। अव्यवस्थाओं के चलते यहाँ आए दिन बेजुबान गौवंश अकारण काल के गाल में समा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं।

​संचालक समिति की बेरुखी, नेताओं की चुप्पी

​हैरानी की बात यह है कि गौशाला की देखरेख के लिए जिम्मेदार संचालक समिति को इन मौतों की भनक तक नहीं है। एक तरफ बड़े-बड़े मंचों से 'गौमाता को राष्ट्रमाता' का दर्जा देने की मांग करने वाले राजनेता इस वीभत्स स्थिति पर मौन साधे बैठे हैं। क्या इन नेताओं की संवेदनाएं केवल चुनावों तक सीमित हैं? बम्होडी की इस बड़ी घटना का संज्ञान न लेना उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

सरपंच का संवेदनहीन बयान: "गलती हो जाती है"

​जब इस बदहाली और गौवंश की मौतों को लेकर ग्राम पंचायत सरपंच से सवाल किया गया, तो उनका जवाब बेहद गैर-जिम्मेदाराना और शर्मनाक रहा। उन्होंने अत्यंत हल्के लहजे में कहा कि "गलती हो जाती है।" क्या मासूम गायों की जान लेना सिर्फ एक 'गलती' है? क्या प्रशासनिक पदों पर बैठे लोगों के लिए इन बेजुबानों के प्राणों की कोई कीमत नहीं है? यह बयान न केवल उनकी अक्षमता को दर्शाता है, बल्कि मृत गौवंश का अपमान भी है।

​मुख्य सवाल जो जवाब मांगते हैं:

​प्रशासनिक अनदेखी: गौशाला के बजट और संसाधनों का उपयोग कहाँ हो रहा है?

​चिकित्सा अभाव: क्या बीमार गायों को समय पर उपचार और चारा-पानी मिल रहा है?

​जवाबदेही: आखिर इन अकारण मौतों का असली जिम्मेदार कौन है और उन पर कठोर कार्रवाई कब होगी?

निष्कर्ष

​बम्होडी की गौशाला से आ रही ये तस्वीरें मानवता को शर्मसार करने वाली हैं। प्रशासन को चाहिए कि तत्काल हस्तक्षेप कर दोषी सरपंच और समिति पर कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई करे, ताकि 'सेवा' के नाम पर 'क्रूरता' का यह खेल बंद हो सके।

जिला ब्यूरो छब्बी लाल कमलेशिया की रिपोर्ट

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