Breaking

अपनी भाषा चुने

POPUP ADD

सी एन आई न्यूज़

सी एन आई न्यूज़ रिपोर्टर/ जिला ब्यूरो/ संवाददाता नियुक्ति कर रहा है - छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेशओडिशा, झारखण्ड, बिहार, महाराष्ट्राबंगाल, पंजाब, गुजरात, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटका, हिमाचल प्रदेश, वेस्ट बंगाल, एन सी आर दिल्ली, कोलकत्ता, राजस्थान, केरला, तमिलनाडु - इन राज्यों में - क्या आप सी एन आई न्यूज़ के साथ जुड़के कार्य करना चाहते होसी एन आई न्यूज़ (सेंट्रल न्यूज़ इंडिया) से जुड़ने के लिए हमसे संपर्क करे : हितेश मानिकपुरी - मो. नं. : 9516754504 ◘ मोहम्मद अज़हर हनफ़ी - मो. नं. : 7869203309 ◘ सोना दीवान - मो. नं. : 9827138395 ◘ आशुतोष विश्वकर्मा - मो. नं. : 8839215630 ◘ सोना दीवान - मो. नं. : 9827138395 ◘ शिकायत के लिए क्लिक करें - Click here ◘ फेसबुक  : cninews ◘ रजिस्ट्रेशन नं. : • Reg. No.: EN-ANMA/CG391732EC • Reg. No.: CG14D0018162 

Sunday, April 5, 2026

विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत आज -इस दिन सच्चे मन से भगवान गणेश जी की पूजा अर्चना करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

 विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत आज -इस दिन सच्चे मन से भगवान गणेश जी की पूजा अर्चना करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।    




       सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी।

वैशाख माह में आने वाली विकट संकष्टी चतुर्थी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान गणेश जी को समर्पित होता है और हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। पंचांग के अनुसार साल 2026 में वैशाख विकट संकष्टी चतुर्थी 5 अप्रैल, रविवार को पड़ रही है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से गणपति की पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।


विकट संकष्टी तिथि 2026


* चतुर्थी तिथि शुरू: 5 अप्रैल 2026, रविवार को सुबह 11:59 बजे से.


• चतुर्थी तिथि समाप्त: 6 अप्रैल 2026, सोमवार को दोपहर 02:10 बजे तक.


• व्रत की तारीख: उदयातिथि और चंद्रोदय की गणना के अनुसार, विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत 5 अप्रैल 2026, रविवार को रखा जाएगा।


वैशाख विकट संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त-


• ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:35 से 05:21 तक


• अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:59 से दोपहर 12:49 तक


• अमृत काल: सुबह 10:50 से दोपहर 12:24 तक


विकट चतुर्थी का धार्मिक महत्व-


धार्मिक मान्यता के अनुसार विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत विशेष रूप से संकटों को दूर करने वाला माना जाता है। “संकष्टी” का अर्थ ही होता है संकटों का नाश करने वाला, इसलिए इस दिन गणपति बप्पा की आराधना करने से व्यक्ति के जीवन में आ रही परेशानियां कम होने की मान्यता हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही, इस व्रत को करने से बुद्धि, ज्ञान और सफलता की प्राप्ति होती है।


गणेश जी और ग्रहों का गहरा संबंध-


ज्योतिष में भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और रिद्धि-सिद्धि का स्वामी माना गया है। इनका सबसे गहरा संबंध बुध ग्रह से है। यदि कुंडली में बुध कमजोर हो तो व्यक्ति को निर्णय लेने में कठिनाई, व्यापार में हानि और बोलचाल में समस्या आती है। विकट संकष्टी चतुर्थी पर गणेश पूजा करने से बुध ग्रह मजबूत होता है। साथ ही केतु के नकारात्मक प्रभाव को भी शांत किया जा सकता है।


पूजा विधि-

• विकट संकष्टी के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।


• एक साफ चौकी पर एक लाल या पीले वस्त्र बिछाएं और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।


• भगवान गणेश को पंचामृत से स्नान कराएं और फिर स्वच्छ जल से शुद्ध करें।


• प्रभु को वस्त्र अर्पित करें और उन्हें सिंदूर, मोदक, अक्षत, फूल-फल और दूर्वा चढ़ाएं।


• गणपति बप्पा को बेसन के लड्डू का भी भोग लगाएं और कुछ मौसमी फलों का भी भोग लगाएं।


 आरती करें और शाम को चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य दें।

No comments:

Post a Comment

Please do not enter any spam link in the comment box.

Hz Add

Post Top Ad