(सरस्वती शिशु मंदिर सरस्वती विहार रायपुर में अंको का धमाका, परिणाम बना मिसाल, कक्षा प्रथम से कक्षा एकादश तक भैय्या बहनो ने रचा इतिहास, अतिथि बोले-यही भैय्या बहनो का उज्जवल भविष्य )
सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सरस्वती विहार रायपुर में आज दिनांक 25 अप्रैल 2026 दिन शनिवार को कक्षा प्रथम से कक्षा एकादश तक के भैय्या बहनो का वार्षिक परीक्षा परिणाम घोषित किया गया।
यह परीक्षा परिणाम इस वर्ष एतिहासिक और गौरवशाली रहा। जहां कक्षा प्रथम से कक्षा एकादश तक के भैय्या बहनो ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सफलता का नया कीर्तिमान स्थापित किया।
विद्यालय परिसर में खुशी गर्व और उत्साह का माहौल देखने को मिला जिसमें लगभग 150 अभिभावकगण उपस्थित थे। आज के इस कार्यक्रम में अतिथि के रूप में श्री जितेन्द्र परिहार (मध्य क्षेत्र के क्षेत्रीय मंत्री),डा.देवनारायण साहू (शिक्षा संस्थान-संगठन मंत्री),डा. कल्पना चौबे(सामाजिक कार्यकर्ता, राष्ट्र सेविका समिति के सेविका), श्री वल्लभ लाहोटी (मां सरस्वती बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष),श्री प्रकाश सिंह ठाकुर (मां सरस्वती बाल कल्याण समिति के सचिव),श्री गौरीशंकर कटकवार (छत्तीसगढ़ प्रांत के प्रांत प्रमुख),श्री किशोर तारे (इतिहास कार, साहित्य कार),डा. अजय कुलश्रेष्ठ (मां सरस्वती बाल कल्याण समिति के सदस्य),श्री राघवेन्द्र ठाकुर (मां सरस्वती बाल कल्याण समिति के सदस्य), श्री ओंकार ताम्रकार (अभिभावक)श्री सुनीता ठाकुर (अभिभावक), श्रीमती उत्तरा वर्मा (विद्यालय के प्राचार्या),श्री गिरीश चंद्र वर्मा (विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य), एवं समस्त आचार्यगण एवं भैय्या बहन उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियो द्वारा मां सरस्वती, भारत माता एवं ओम के छायाचित्र पर द्वीप प्रज्ज्वलित कर सरस्वती वंदना के साथ हुआ उसके बाद कक्षा में प्रथम द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले भैय्या बहनो को अतिथियो के द्वारा प्रगति पत्रक एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर पुरस्कृत किया गया।उसके बाद अतिथियो ने अपने उद्बोधन में समस्त भैय्या बहनो को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसी सफलता हमेशा बना रहे यह सरस्वती मंदिर पढ़ाई के साथ साथ शिक्षा और संस्कार देता है।कक्षा में 80% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले भैय्या बहनो को मेधावी परीक्षा के लिए चयन किया गया है। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्राचार्या श्रीमती उत्तरा वर्मा दीदी ने धन्यवाद ज्ञापित कर शांति पाठ के साथ समापन किया गया।




















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