आज है, नरसिंह जयंती भगवान नृसिंह के अवतरण का पावन दिन।
सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी।
पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु ने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए आधे मनुष्य और आधे सिंह के रूप में अवतार लेकर हिरण्यकश्यपु का वध किया था। भगवान नृसिंह का रूप बड़ा अद्भुत और निराला है। उसमें जितना क्रोध भरा है उतना ही वात्सल्य भी। भगवान का स्वरूप जहाँ एक तरफ "शांताकारम्" अर्थात् परम शांत है तो दूसरी तरफ अति उग्र भी है। अंतर केवल इतना है, कि विधर्मियों के लिए प्रभु जितने कठोर हैं, धर्मावलंबियों अथवा अपने भक्तों के लिए उतने ही शांत अथवा वात्सल्य रूप भी।
जो जीव धर्म मार्ग का अवलंबन लेता है अथवा उस प्रभु का पावन नामाश्रय लेता है फिर प्रभु द्वारा प्रत्येक स्थिति में उसे अभय प्रदान किया जाता है। बाली के पुत्र अंगद को, रावण के भाई विभीषण को और हिरण्यकशिपु के पुत्र प्रह्लाद को उन कृपा सिंधु प्रभु के द्वारा बड़े स्नेह और आत्मीयता के साथ अपनी शरण प्रदान की जाती है क्योंकि भगवान किसी का कुल, गोत्र एवं परिवार नहीं अपितु केवल उसके हृदय की निर्मल भावना देखते हैं।
जब सारे दरवाजे बंद हो गए हों, उम्मीद की कोई किरण बाकी न रह गई हो और विपत्तियों के चक्रव्यूह ने आपको चारों ओर से घेर लिया हो, उन क्षणों में भी आपका विश्वास उस प्रभु के ऊपर बना रहना चाहिए, तब भले ही नारायण को नृसिंह रूप ही क्यों न धारण करना पड़े और खंबे को ही माँ का गर्भ क्यों न बनाना पड़े, लेकिन अपने भक्तों की रक्षा के लिए वो प्रभु आते अवश्य हैं।


















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