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Tuesday, May 26, 2026

अंकोरी धान खरीदी केंद्र में करोड़ों के घोटाले की बू: शार्टेज दिखाकर 1422 क्विंटल धान गायब, कलेक्टर से उच्च स्तरीय जांच की मांग

 अंकोरी धान खरीदी केंद्र में करोड़ों के घोटाले की बू: शार्टेज दिखाकर 1422 क्विंटल धान गायब, कलेक्टर से उच्च स्तरीय जांच की मांग



महासमुंद/बसना:

महासमुंद जिले के बसना विकासखंड अंतर्गत धान खरीदी केंद्र अंकोरी(कायतपाली) (पंजीयन क्रमांक 1351) में धान खरीदी वर्ष 2025-26 के दौरान भारी अनियमितता और करोड़ों रुपये के हेरफेर का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है।



 केंद्र प्रभारी द्वारा धान के वजन में भारी गड़बड़ी कर 1422.05 क्विंटल धान की शार्टेज (कमी) दिखाई गई है, जिससे न केवल शासन को करोड़ों की चपत लगने की आशंका है, बल्कि क्षेत्र के किसानों और समितियों को भी अपूर्णीय क्षति पहुंची है।




इस गंभीर गड़बड़ी को लेकर जागरूक ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने सीधे माननीय कलेक्टर महासमुंद को आवेदन सौंपकर मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच और केंद्र प्रभारी को तत्काल पद से बर्खास्त करने की मांग की है। इस शिकायत के बाद से सहकारिता विभाग और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

वजन में हेराफेरी कर धान को 'गायब' करने का खेल!

शिकायतकर्ता महेंद्र प्रधान, नारायण राठौर, नरेंद्र राठौर एवं अन्य ग्रामीणों द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए शिकायती पत्र में बेहद चौकाने वाले आरोप लगाए गए हैं। आवेदन के मुताबिक:

 बिना नाप-तौल के बारदाना: केंद्र प्रभारी छेदूराम निषाद द्वारा धान खरीदी के दौरान अपने चहेते व्यक्तियों को बिना किसी सही नाप-तौल और माप के अधिक धान का बारदाना दिया गया।

 

शार्टेज का मायाजाल: वास्तविक तौल के स्थान पर धान के स्टॉक (स्कंध) में हेरफेर कर सीधे 1422.05 क्विंटल धान की कमी (शार्टेज) दर्ज कर दी गई।

 

करोड़ों के पुराने कारनामे: ग्रामीणों का आरोप है कि अनावेदक केंद्र प्रभारी द्वारा पूर्व के कार्यकाल में भी इसी प्रकार की वित्तीय अनियमितताएं और करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई है, जिसका मामला वर्तमान में भी लंबित है।

किसानों की मौजूदगी में हो 'दूध का दूध और पानी का पानी'

शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि इस पूरे महाघोटाले की जांच बंद कमरों या कागजों में न होकर, आस-पास के क्षेत्रीय कृषकों की प्रत्यक्ष उपस्थिति में एक उच्च स्तरीय टीम द्वारा की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र प्रभारी ने अपनी निष्पक्षता खो दी है, इसलिए जब तक जांच पूरी नहीं होती, उन्हें तत्काल प्रभाव से पद से पृथक किया जाए ताकि वे साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ न कर सकें।

इन उच्चाधिकारियों को भी भेजी गई प्रतिलिपि, कार्रवाई तय!

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इस आवेदन की प्रतिलिपि केवल कलेक्टर ही नहीं, बल्कि राज्य के माननीय प्रभारी मंत्री महोदय (महासमुंद जिला), अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बसना, तहसीलदार बसना और उप पंजीयक (सहकारी समितियां) महासमुंद को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई है।

> बड़ा सवाल: आखिर बार-बार शिकायतों के बाद भी ऐसे दागी प्रभारियों को इतने महत्वपूर्ण केंद्रों की कमान क्यों सौंप दी जाती है? क्या प्रशासन इस बार क्षेत्र के किसानों को न्याय दिला पाएगा या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा? अब देखना यह है कि इस कड़े शिकायती पत्र के बाद जिला प्रशासन क्या एक्शन लेता है।

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